बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – भुईंया पोर्टल से जुड़े कार्यों में आ रही समस्याओं, संसाधनों की भारी कमी और भत्ता न मिलने को लेकर छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष भागवत कश्यप ने शासन को ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन राजधानी नवा रायपुर स्थित मंत्रालय, महानदी भवन में सौंपा गया, जिसमें पूरे प्रदेश के पटवारियों की समस्याओं और मांगों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
राजस्व पटवारी संघ बीजापुर इकाई के जिलाध्यक्ष शंकरलाल कतलाम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि 2014 से राज्य सरकार द्वारा भुईंया ऑनलाइन प्रणाली लागू की गई, लेकिन तब से अब तक पटवारियों को आवश्यक तकनीकी संसाधन—जैसे कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, इंटरनेट सुविधा और सुव्यवस्थित कार्यालय—नहीं उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही इस तकनीकी कार्य के लिए किसी प्रकार का भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है।
प्रांताध्यक्ष भागवत कश्यप ने ज्ञापन में केंद्र सरकार की योजनाओं जैसे एग्रीस्टेक, जियो रिफरेंसिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे आदि का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए संसाधनों की अनिवार्यता है। संसाधनों के अभाव में पटवारियों को ‘जुगाड़’ के माध्यम से कार्य करना पड़ रहा है, जिससे तकनीकी त्रुटियाँ उत्पन्न हो रही हैं और इसके लिए पटवारियों को दोषी ठहराया जाना अनुचित है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि नक्शा-बटांकन जैसे संवेदनशील कार्यों में प्रशासन द्वारा जल्दबाजी और दबाव डाला जा रहा है। यह कार्य अत्यंत सूक्ष्म और सटीकता की मांग करता है, जिसमें छोटी सी त्रुटि भी न्यायालयीन विवाद का कारण बन सकती है। पटवारी संघ ने मांग की है कि नक्शा-बटांकन की बजाय शुद्ध एवं त्रुटिरहित नवीन सर्वेक्षण अथवा बंदोबस्त कार्य कराया जाए।
डिजिटल क्रॉप सर्वे जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कृषि योजना के कार्य भी कृषि विभाग के नोडल अधिकारी की बजाय पटवारियों से कराए जा रहे हैं। साथ ही, डीसीएस कार्य के लिए सर्वेयर ढूँढने की जिम्मेदारी भी पटवारियों पर डाल दी गई है, जो असंगत है।
बीजापुर जिलाध्यक्ष शंकरलाल कतलाम ने ज्ञापन का समर्थन करते हुए कहा कि पटवारियों की न्यायोचित मांगों को शासन तत्काल स्वीकार करे ताकि किसानों को बिना किसी परेशानी के सेवाएं मिल सकें। साथ ही उन्होंने राज्य में रिक्त राजस्व निरीक्षक पदों पर समय-समय पर प्रमोशन के जरिए पटवारियों की पदोन्नति सुनिश्चित करने की भी मांग की।



