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पर्यावरण विभाग की बड़ी कार्रवाई, 6 ट्रकों पर जुर्माना, करोड़ों की धोखाधड़ी में अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप

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Major action by the environment department, 6 trucks fined, allegations of collusion of officials in fraud worth crores

फ्लाई ऐश घोटाला बेनकाब: एनटीपीसी से निकली गाड़ियाँ अवैध डंपिंग करते पकड़ी गईं

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रायगढ़। आखिरकार महीनों से चल रही आशंकाएं और मीडिया रिपोर्टें सही साबित हुईं। पर्यावरण विभाग ने एनटीपीसी से फ्लाई ऐश लेकर निकली 6 गाड़ियों को रायगढ़ के कलमी क्षेत्र में अवैध रूप से राखड़ डंप करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। विभाग ने इन गाड़ियों पर लाखों रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट पर लगी मुहर

गत कई महीनों से लगातार मीडिया में यह खबरें प्रकाशित हो रही थीं कि एनटीपीसी से फ्लाई ऐश ढोने वाले कुछ ट्रांसपोर्टर्स पुसौर, कोड़ातराई और आसपास के क्षेत्रों में नियम विरुद्ध राखड़ का डंपिंग कर रहे हैं। इस कार्रवाई ने उन आशंकाओं की पुष्टि कर दी।

सिर्फ ट्रांसपोर्टर नहीं, अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध

सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में ट्रांसपोर्टर्स के साथ एनटीपीसी के कुछ अधिकारी के भी शामिल होने की आशंका जताई जा है। बताया जा रहा है कि एक पूरा सिंडिकेट इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहा है, जो न केवल पर्यावरणीय नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

GPS सिस्टम को भी किया गया हैक, पारदर्शिता पर भारी पड़ा भ्रष्ट तंत्र

सत्ता परिवर्तन के बाद वित्त मंत्री और रायगढ़ विधायक की पहल पर फ्लाई ऐश के परिवहन में पारदर्शिता लाने के लिए जीपीएस सिस्टम लागू किया गया था। लेकिन इस घोटाले में शामिल लोगों ने कथित रूप से GPS सिस्टम को ही हैक कर लिया और नियत स्थानों जैसे रायपुर और बलौदाबाजार में फ्लाई ऐश खाली करने की बजाय 20–30 किमी के दायरे में ही अवैध डंपिंग कर रहे थे। कार्यवाही से यह स्पष्ट हो गया है कि कुछ ट्रांसपोर्टर सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों का संरक्षण पाकर, एनटीपीसी से करोड़ों रुपये की बिलिंग कर रहे हैं जबकि वास्तविक रूप में फ्लाई ऐश को तय स्थान पर पहुंचाया ही नहीं जा रहा था।

क्या कहता है यह घोटाला?

सरकारी नियमों की खुली अवहेलना, पर्यावरणीय खतरे को आमंत्रण, पारदर्शिता योजनाओं की विफलता, जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर लोगों में खूब चर्चा हो रही है।

फ्लाई ऐश घोटाले की यह कार्रवाई केवल एक शुरुआत मानी जा रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इस सिंडिकेट की जड़ तक जाकर कार्रवाई करेगा? या फिर यह मामला भी राजनीतिक दवाब में ठंडे बस्ते में चला जाएगा? फिलहाल, पर्यावरण विभाग की यह कार्रवाई आगे की बड़ी जांच की भूमिका तैयार करती नजर आ रही है।

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