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सोने के दामों में गिरावट:  ₹1000 से ज्यादा टूटा सोना, हफ्तेभर में बड़ी गिरावट, देखें लेटेस्ट गोल्ड रेट

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नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में पिछले एक हफ्ते में सोने के दामों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक संकेतों और डॉलर की मजबूती के चलते, 24 कैरेट सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम) अपने ऊपरी स्तरों से ₹1,000 से ₹1,500 तक टूट गया है। यह गिरावट उन निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है, जिन्होंने हाल ही में उच्च कीमतों पर खरीदारी की थी, जबकि नए निवेशकों के लिए यह एक आकर्षक अवसर हो सकता है।

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पिछले हफ्ते का ट्रेंड: उछाल के बाद फिसलन

 

सप्ताह की शुरुआत में, सोना मजबूती के साथ ट्रेड कर रहा था और 22 जुलाई को ₹1,00,020 प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) के स्तर पर पहुंच गया था। यह ₹1 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुका था, जिससे बाजार में उत्साह था। हालांकि, मध्य सप्ताह से गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ, और सप्ताहांत तक भाव में उल्लेखनीय कमी आई। शुक्रवार, 25 जुलाई को दिल्ली बुलियन मार्केट में सोने का भाव ₹500 तक गिरकर ₹99,120 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। आज, 27 जुलाई को भी कीमतें लगभग इसी निचले स्तर पर या उससे थोड़ी ऊपर/नीचे बनी हुई हैं।


 

गिरावट के प्रमुख कारण

 

सोने की कीमतों में इस गिरावट के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं:

  • अमेरिकी डॉलर में मजबूती: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अटकलों और मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के कारण डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग में कमी आती है।
  • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी: अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि से निवेशकों का रुझान सोने जैसे गैर-उपज वाले एसेट से हटकर बॉन्ड की ओर हो जाता है, जिससे सोने पर दबाव पड़ता है।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव: वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में गिरावट का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।
  • निवेशकों का मुनाफावसूली: कीमतें ₹1 लाख के स्तर को छूने के बाद कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बाजार में बिक्री का दबाव बढ़ गया।
  • व्यापार समझौते की उम्मीदें: कुछ बड़े व्यापार समझौतों की दिशा में हुई प्रगति की उम्मीदों ने भी सुरक्षित-हेवन (safe-haven) एसेट के रूप में सोने की अपील को कम किया है।

 

आगे क्या?

 

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के दाम अभी भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की नीतियों से प्रभावित होते रहेंगे। हालांकि, यह गिरावट उन निवेशकों के लिए एक अवसर प्रदान कर सकती है जो लंबी अवधि के लिए सोने में निवेश करना चाहते हैं। बाजार पर पैनी नजर रखना और किसी भी निवेश से पहले विशेषज्ञों से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

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