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शिव विवाह का वर्णन सुनकर भाव विभोर हुए भक्त, शिव बारात में पहुंचे भूत-प्रेत-औघड़

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*प्रमोद अवस्थी मस्तूरी*

नवयुवक दुर्गोत्सव समिति दुर्गा चौक मस्तूरी (पुराना बाजार) द्वारा सावन के अति पवित्र सावन माह में संगीत मय श्री शिव जी के श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ में भगवान शिव एवं पार्वती के विवाह की कथा सुन पण्डाल में उपस्थित महिला, पुरुष भक्त श्रद्धालु गण भाव विभोर होकर शिव भजन में अपने आप को नृत्य करने से नहीं रोक पाए कथा के दौरान बीच-बीच में मनोहर गीत प्रस्तुत किया गया।

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दुर्गा पूजा समिति द्वारा दुर्गा चौक में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्री शिव महापुराण कथा में शुक्रवार की शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालु गण मौजूद थे। कथा वाचक प. श्री श्रीधर शर्मा जी महाराज ने भक्तों को शिव पार्वती के विवाह की कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि भगवान शिव की बारात जब हिमाचल पहुंची तो माता पार्वती के माता पिता बारात में सम्मिलित भूत, प्रेत औघड़ को देखकर चकित रह गए।

श्री श्रीधर शर्मा ने बताया कि माता पार्वती के विवाह में उनकी तरफ से उच्च कुलों के राजा-महाराजा शामिल हुए, लेकिन शिव जी की ओर से कोई रिश्तेदार नहीं पहुंचा था, क्योंकि वे किसी भी परिवार से ताल्लुक नहीं रखते। श्री शिव महापुराण में उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष भगवान शिव और पार्वती विवाह का रोचक प्रसंग का व्याख्यान करते हुए कथावाचक ने कहा कि शिव दुनिया के सबसे तेजस्वी थे। वे पार्वती को अपने जीवन का हिस्सा बनाने वाले थे। भगवन शिव एवं पार्वती की शादी में सभी देवी देवता और असुर भी वहां पहुंचे। जानवर, सारे जीव उनके विवाह में उपस्थित हुए। यहां तक कि भूत-पिशाच भी उनके विवाह में बाराती बन कर पहुंचे। कथा स्थल पर भगवान भोलेनाथ तथा मां पार्वती का शुभ विवाह के पश्चात पाडी ग्रहण तथा उपहार भेंट किया गया।
*लटेस्वर नाथ धाम से निकली भगवान शंकर भोले बाबा जी की बारात*
श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ कथा के दौरान किरारी स्थित स्वयंभू भगवान लटेश्वर नाथ धाम से बैंड बाजा आतिश बाजी फूलों की वर्षा के साथ भूत प्रेत पिशाच नंदी पे सवार होकर भगवान शंकर भोले बाबा जी के बारात का हिमालय रूपी कथा स्थल पर अभूतपूर्व स्वागत कर उपस्थित महिलाएं युवतियाएं बच्चे बुजुर्ग एवं समिति के सदस्यों ने बैंड बाजे में खूब डांस किए। तत्पश्चात जयमाला का कार्यक्रम पश्चात कन्यादान तथा अन्य कार्यक्रम हुआ।

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