Tribal boys hostel in bad condition – electric current from roof during rain, no drainage, broken toilets, lives of 46 children at risk
मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
= शासकीय प्री मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास लोरमी चीख चीख कर बया कर रहे सच्चाई …
मुंगेली / लोरमी – शासकीय प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास लोरमी की स्थिति इन दिनों अत्यंत जर्जर और चिंताजनक हो गई है। छात्रावास में निवासरत लगभग 46 से 47 आदिवासी बालक अपने जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं। छात्र सुनील कुमार बैगा, दिनेश कुमार बैगा,व समस्त छात्र और जनप्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता देव मार्को से मिली जानकारी के अनुसार:
👉 छात्रावास भवन बुरी तरह जर्जर हो चुका है।
👉 बारिश के समय छत से पानी रिसता है और कई बार छत में करंट आने की शिकायत भी सामने आई है।
👉 परिसर में नाली की व्यवस्था नहीं है, जिससे गंदा पानी परिसर में ही भर रहता है।
👉 खेल मैदान में बड़े-बड़े घास उग आए हैं, जिससे खेल गतिविधियां बंद पड़ी हैं।
👉 शौचालय के दरवाजे टूटे और जर्जर हैं, जिससे छात्राओं को भारी असुविधा होती है। बच्चियों द्वारा इस स्थिति को लेकर कई बार आवाज उठाई गई है। लेकिन छात्रावास अधीक्षक ओपी साहू के कागजी कार्यवाही तक ही सीमट कर रह जाता है जिससे बच्चों के जान पर अब आफत आ गया है,
👉 भोजन भी पर्याप्त और पौष्टिक नहीं दिया जाता, जिससे छात्राएं कुपोषण की शिकार हो सकते हैं। शासकीय प्री मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास लोरमी के बच्चों का यह भी कहना है कि हमें सुबह नाश्ता में किसी प्रकार का कोई पौष्टिक आहार नहीं दिया जाता है सुबह और शाम को खाना दाल सब्जी बस दिया जाता है सब्जी बार-बार एक ही प्रकार का दिया जाता है और सब्जी मीनू चार्ट के अनुसार से नहीं दिया जाता है शाम को हमें 5:00 बजे खाना खिला दिया जाता है जिससे रात को हमें भूख लगने लगता है , जिसके वजह से कई बच्चों का तो तबीयत भी खराब हो गया, हमारे द्वारा 7:00 बजे शाम को खाना देने का मांग किया गया है फिर भी हमारे मांगों पर छात्रावास अधीक्षक ओपी साहू के द्वारा अभी तक कोई विचार नहीं किया गया,
वही पत्रकारों के द्वारा छात्रावास अधीक्षक ओपी साहू से छात्रावास के संबंध में जानकारी चाही गई तो साहू के द्वारा कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया गया,
आदिवासी बालक छात्रावास लोरमी अधीक्षक ओपी साहू….
जिसके बाद इस संबंध में जब जानकारी आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त महेन्द्र खांणडेकर से चाही गई तो मामले की गंभीरता को मजाक समझते हुए छात्रावास अधीक्षक ओपी साहू से जवाब-तलब किया, जिसके बाद सहायक आयुक्त महेंन्द्र खांडेकर के द्वारा छात्रावास अधीक्षक ओपी साहू का ही पक्ष लेते हुए गोल-गोल जवाब देते हुए नजर आए,
सहायक आयुक्त महेंन्द्र खांडेकर..
मुंगेली कलेक्टर कुंदन कुमार को वीडियो दिखाकर जानकारी लिया गया तो मुंगेली कलेक्टर के द्वारा त्वरित कार्यवाही का आश्वासन दिया है।
मुंगेली जिला कलेक्टर कुंदन कुमार…..
छात्रावास की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जताई है और छात्रावास भवन की तत्काल मरम्मत और पुनर्निर्माण का मांग किया गया, साथ ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए भोजन की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार हो अधीक्षक ओपी साहू की कार्यप्रणाली की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए कहां गया,
देव मार्को..…..
अगर शासकीय प्री मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास लोरमी के अधीक्षक द्वारा भवन मरम्मत के लिए आए हुए राशि में गड़बड़ी की गई हो, या बच्चों के आहार (खाना-पानी) में गड़बड़ी हो — जैसे कि निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन नहीं देना, गुणवत्ता में कमी, या धन का दुरुपयोग — तो यह एक गंभीर प्रशासनिक और आपराधिक मामला बनता है।
ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी पर निम्नलिखित धाराओं और कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है:
⚖️ संभावित धाराएं व कानून:
1. भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएं:
धारा 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात)
– अगर अधीक्षक ने सरकारी धन का गबन किया है या दुरुपयोग किया है तो यह धारा लागू हो सकती है।
सजा: 10 साल तक का कठोर कारावास + जुर्माना
धारा 420 (धोखाधड़ी)
– अगर किसी को धोखा देकर पैसा या लाभ प्राप्त किया गया है।
सजा: 7 साल तक की सजा + जुर्माना
धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात)
– सरकारी जिम्मेदारी के तहत दिए गए संसाधनों का दुरुपयोग करना।
धारा 120B (षड्यंत्र)
– यदि यह कार्य अकेले नहीं बल्कि किसी अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर किया गया है।
2. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act):
धारा 7:
– लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेने या भ्रष्ट कार्य करना।
धारा 13(1)(c) और 13(1)(d):
– सार्वजनिक पद का दुरुपयोग कर सरकारी धन का गबन या अनुचित लाभ प्राप्त करना।
3. छत्तीसगढ़ सरकारी सेवक आचरण नियमावली
– इस तरह के मामलों में अधीक्षक के विरुद्ध प्रशासनिक जांच की जा सकती है और निलंबन / बर्खास्तगी की कार्यवाही की जा सकती है।
लेकिन सवाल यहां पर आकर रुक जाता है कि सरकार के द्वारा प्रत्येक साल छात्रावास मरम्मत के लिए पैसा दिया जाता है या नहीं यह दिया जाता है तो उस पैसे के मरम्मत करवाया जाता है या नहीं , अगर दिया जाता है तो आखिर पैसा कहां जाता है जिसके कारण भवन इतना बत से बत्तर हो गया है, आखिर जिम्मेदार कौन, यह सब सवाल छात्रावास अधीक्षक ओपी साहू के कार्यप्राणी पर सवाल उठता है,
फिर हाल खबर प्रकाशन उपरांत उच्च अधिकारियों के द्वारा क्या कार्यवाही किया जाता है यह आगामी दिनों में देखने वा ली बात होती है



