Joyous Dahikado tradition in Pusaur on Janmashtami festival
पुसौर / तहसील मुख्यालय पुसौर में प्रत्येक तीज त्यौहार को कमोबेष उल्लासमय वातावरण में संपन्न कराने की परंपरा पिछले कई वर्शो से चली आ रही है। इसके लिये पुसौर के लोग स्वतः ही अपनी जिम्मेदारी तय कर लेते हैं और इसमें ये आगे आकर इसे जिवित रखे हुये हैं। भगवान कृश्ण के जन्म के अवसर पर इसे प्रायः मनाया जाता है इस वर्श इसे मुर्तरूप् देने में ग्राम पंचायत कार्यकाल के पंच बद्री नारायण महाणा, पदमुख महाणा, पलउ यादव, सकरी गुप्ता, चैतु गुप्ता, सुरेष महाणा, नारायण साव, राघव साव, सुभाश यादव, तरूण साव, पंकज महाणा, षुरू पसायेत भुरू सौंरा सहित अन्य लोगों का महत्वपुर्ण भुमिका रहा। जानकारी के मुताविक बिते षनिवार दहिकादो के दिन सुबह से इसके तैयारी में लग गये जिसमें इन्हौने प्रसाद तथा बाजा वालों को किये। मंदिर में सामुहिक रूप से सर्वप्रथम प्रसाद तैयार किया गया और बाजा और हाना के बीच उक्त समुचे लोग टोली बनाकर नगर के गलियों में भगवान कृश्ण के जयघोस के साथ लोगों को प्रसाद वितरण किये वहीं दहि और रंग से बने लेप को लोगों के माथे में लगाते गये। इस परंपरा में एक खास बात यह है कि इस एक दो साल के बीच जिस किसी के घर में बच्चा हुआ रहता है उसके यहां यह टोली जाती है और उन्हें बधाई व षुभकामनाएं देते है। उक्त संबंध में नगर पंचायत उपाध्यक्ष उमेष साव ने बताया कि पुसौर के सारे पंरपरा एवं प्रथाओं को निर्वाह करने के लिये यहां के लोग स्वतः तैयार मिलते हैं जिसकी वजह से आज छोटा सा कार्यक्रम दहिकादो निर्वाध गति से प्रत्येक वर्श होता रहा है।



