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भिलाई की डॉ. राखी रॉय ने अपने शिष्यों के साथ दी भरतनाट्यम की शानदार प्रस्तुति

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Dr. Rakhi Roy of Bhilai gave a wonderful performance of Bharatnatyam with her disciples

रायगढ़ / चक्रधर समारोह के दूसरे दिन गुरुवार को भिलाई से आईं प्रख्यात नृत्यांगना और भरतनाट्यम डॉ. राखी रॉय ने अपने शिष्यों के साथ भरतनाट्यम की शानदार प्रस्तुति से रामलीला मैदान में मौजूद दर्शकों को भावविभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति में भरतनाट्यम की पारंपरिक गरिमा, गहन अभिव्यक्ति और अद्भुत लयताल का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने हर किसी के मन को छू लिया। डॉ. रॉय ने अपने नृत्य में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गहराई को उजागर करते हुए विभिन्न भावों और मुद्राओं के माध्यम से भक्ति और रसमयता की सजीव छटा बिखेरी। उनकी प्रस्तुति में नृत्य की शुद्धता, कथ्य की संवेदनशीलता और नृत्य सौंदर्य की छाप स्पष्ट दिखाई दी। डॉ. राखी रॉय ने अपने शिष्यों के साथ भगवान शिव के नटराज के विभिन्न रूपों पर आधारित प्रस्तुति, अर्धनारीश्वर, मां जननी आदि पर आधारित आकर्षक प्रस्तुति दी। डॉ. राखी रॉय के साथ उनके शिष्य श्री दुष्यंत साहू, कुमारी पलक उपाध्याय, कुमारी अम्बे उपाध्याय, कुमारी सृजन बनर्जी,कुमारी साध्वी अवधूत, कुमारी पद्मजा मंजिल पिल्ले,कुमारी शर्मिष्ठा घोष, कुमारी नारायणी पांडे, कुमारी ऑरेल एन जॉनसन और कुमारी निशिका बनर्जी ने मनमोहक प्रस्तुति दी।

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डॉ. राखी रॉय प्रदेश की सुविख्यात भरतनाट्यम गुरु है। उन्होंने साढ़े चार वर्ष की अल्प आयु से ही भिलाई में अपने गुरु श्री केशवन पिल्लई से भरतनाट्यम का प्रशिक्षण लेना प्रारंभ कर दिया था। वर्ष 1993 में विज्ञान स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद डॉ.राखी रॉय ने वर्ष 2002 में भरतनाट्यम नृत्य विधा में विशारद की उपाधि प्राप्त की। भिलाई में कई शाखाओं के साथ-साथ दुर्ग और रायपुर में भी गुरु राखी रॉय के नृत्य प्रशिक्षण केंद्र संचालित है। डॉ.राखी रॉय देश-विदेश में अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपने भारतनाट्यम की प्रस्तुति दे चुकी है। उन्हें विभिन्न प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। जिनमें नृत्य भूषण, नृत्य विभूषण, नृत्य कला रत्न, आचार्य श्रेष्ठ, नाट्याचार्य आदि प्रमुख है। डॉ. राखी रॉय का नृत्य केवल देखने का आनंद ही नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का गहन अनुभव भी प्रदर्शित करती है। इस मौके पर उपस्थित कला-प्रेमियों और अतिथियों ने उनकी प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे चक्रधर समारोह का अविस्मरणीय पल बताया। समारोह में उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। दर्शकों ने इस सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रदर्शन का भरपूर आनंद लिया।

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