Courage to overcome all challenges of life: – Principal Chandrashekhar Koshle
मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
मुंगेली – लोरमी:- आज हमारे विद्यालय दशरथ लाल अमरीका बाई आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बंधवा वि.ख.लोरमी जिला मुंगेली में भारत के द्वितीय राष्ट्रपति सर्वपल्ली डा.राधा कृष्णन जी के 137वी जयंती को शिक्षक दिवस के रुप बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया।
सर्व प्रथम छात्र छात्राओं द्वारा स्कूल में विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जैसे गायन,नृत्य,ड्रम वादन पसंदीदा शिक्षक शिक्षिकाओं की नकल करना,जो कि हास्यपूर्ण तथा सम्मानजनक तरीके से किया गया।
वह छात्र-छात्राओं द्वारा सभी शिक्षक शिक्षिकाओं को उपहार भेंट की गई।
शिक्षक दिवस के अवसर पर प्राचार्य चंद्रशेखर कोशले ने अपने संबोधन में छात्र-छात्राओं को कहा कि भारत में शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाता है और यह परंपरा 1962 से शुरू हुई थी। इसी दिन डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था। वे एक दार्शनिक, विद्वान,शिक्षक और राजनीतिज्ञ थे और शिक्षा के प्रति उनके समर्पित कार्य ने उनके जन्मदिन को भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन बना दिया।
एक शिक्षक अपने छात्रों को किताबी ज्ञान से परे उसे जीवन की सभी चुनौतियों को पार करने का साहस सिखाता है। शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। शिक्षक केवल पढ़ाते ही नहीं, बल्कि वह छात्रों को जीवन में सकारात्मक नजरिया अपनाने और अपने सपनों को कड़ी मेहनत से हासिल करने का जुनून भी विकसित करते हैं।
राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी गोविंद नवरंग ने अपने स्कूली शिक्षा के दिनो को याद करते हुए कहा कि शिक्षक ज्ञान और बुद्धि के स्तंभ होते हैं। वे न केवल शैक्षणिक पाठ पढ़ाते हैं,बल्कि जीवन के बहुमूल्य पाठ भी सिखाते हैं । मेरे सभी अद्भुत शिक्षकों में से,मेरे पसंदीदा शिक्षक श्री कश्यप हैं,जो मेरे स्कूल में गणित पढ़ाते थे।
जो गणित को झांकी की तरह प्रस्तुत करते थे। इत्यादि बातें कहीं।
व्याख्याता शिक्षक गजेन्द्र गर्ग ने कहा कि सर्वप्रथम शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं शिक्षक अपने ज्ञान का दीपक जलाकर हमारे जीवन को रोशन किया है। उनके मार्गदर्शन के लिए हम हमेशा आभारी रहेंगे। -एक शिक्षक की पहचान उसके मार्गदर्शन से भी होती है। क्योंकि,सिर्फ पढ़ाना ही नहीं, बल्कि विषम परिस्थितियों में सही रास्ता दिखाना भी सच्चे शिक्षक की पहचान होती है इत्यादि बाते कही।
व्याख्यता शिक्षिका सेवती साहू ने कहा कि शिक्षक दिवस का उद्देश्य शिक्षकों के ज्ञान,नेतृत्व और समाज सेवा का सम्मान करना है। इस दिन स्कूल-कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रम,भाषण,एवं सम्मान समारोह आयोजित किए जाते हैं। भारत में गुरु को बहुत ऊंचा दर्जा दिया गया है। भगवान से भी ऊपर शिक्षक को माना जाता है।
इस अवसर पर उपप्राचार्य मधु मिरी व्याख्याता शिक्षक/शिक्षिका क्रमशः विरेंद्र साहू, विरेंद्र मानकर, अनिता पात्रे, हेमलता भास्कर, काजल टोंडे, सकिना कुर्रे,मासूम कोशले, राजीव कोशले एवं छात्र-छात्राएं कर्मचारी चंद्रशेखर बंजारे,कुलदीप,सचिन कोशले,झरना, जानसी भास्कर,रितु साहू,यामिनी साहु,सुमन,सागर प्रीति मरावी,सुजाता,पायल साहू,शालिनी साहू ,देवीका,प्रेमसागर,अतुल,लुसेन, प्रियंका,आशीष,तारीका, रंजीता खांडे,धनंजय,संजू,पायल,आदित्य अर्जुन ,राहुल,भूपेश,भुनेश्वरी ज्ञानेश्वरी करीना,लोकेश,संजना,दीपक सिंह ठाकुर,आर्यन बर्मन,भावेश,अर्पित कुमार,लेखराम साहू,धनेश्वर नवीन डाहिरे,श्रद्धा माथुर व छात्र-छात्राएं अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित रहे।



