Home Blog नए जीएसटी सुधारों से देश की जनता को महंगाई से राहत मिलेगी-...

नए जीएसटी सुधारों से देश की जनता को महंगाई से राहत मिलेगी- विक्रम उसेंडी

0

The people of the country will get relief from inflation due to new GST reforms- Vikram Usendi

कांकेर। नए जीएसटी सुधारो के बारे में जनता तक जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य ये आज भाजपा कार्यलय कमल सदन कांकेर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेंडी द्वारा प्रेसवार्ता ली गई ।
प्रेसवार्ता में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश लाटिया , भाजपा जिलाध्यक्ष महेश जैन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे ।
प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए विक्रम उसेंडी ने कहा कि भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है।

Ro.No - 13672/156

2017 में जीएसटी लागू होने से पहले देश मे 17 प्रकार के टैक्स और 13 प्रकार के सेस लागू थे । राज्य सरकारें कभी भी कोई भी टैक्स लागू कर देती थी । किसी चीज का मूल्य एक प्रदेश में अलग और दूसरे प्रदेश में अलग होता था । कांग्रेस सरकार के समय आयकर की दर अधिकतम 97 प्रतिशत तक पहुंच गया था ।
उन्होंने बताया कि देश मे 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने के बाद कर और आर्थिक सुधारो की ओर कदम बढ़ाते एक देश एक कर लागू किया गया। जीएसटी की दरों को 4 स्लैब से घटाकर अब मात्र दो स्लैब 5 व 18 प्रतिशत रखा गया है ।

श्री उसेंडी ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में जीएसटी में अगली पीढ़ी के सुधार करने का आश्वासन दिया था. और मात्र बीस दिन की भीतर ही जीएसटी काउंसिल ने इस सुधार को मंजूरी दे दी गई है।

नये सुधार से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। रोजमर्रा की अनेक वस्तुएं जैसे तेल, शैम्पू, टूथपेस्ट, मक्खन, पनीर, सिलाई मशीन से लेकर ट्रैक्टर व उसके कलपूर्जे व अन्य कृषि उपकरण तथा व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, शैक्षणिक वस्तुओं के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक व ऑटोमोबाइल उत्पादों को किफायती बनाया गया है।

एक विकसित अर्थव्यवस्था में करदाता अधिक, और टैक्स की दर कम होना चाहिए। इसी लक्ष्य को हासिल किया है जीएसटी ने। जीएसटी करदाता 2017 में 66.5 लाख से बढ़कर 2025 में 1.51 करोड़ हो गए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में सकल जीएसटी संग्रह 22.08 लाख करोड़ रुपये रहा, जो केवल चार वर्षों में दोगुना हो गया है।

जीएसटी कम होने का लाभ वस्त्र उद्योग को विशेष रूप से निर्यात के लिए होगा। हस्तशिल्प की कम दरें कारीगरों की आजीविका को समर्थन देंगी, विरासत को संरक्षित करेंगी और ग्रामीण आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगी। ऑटोमोटिव में स्पष्ट वर्गीकरण से विवाद कम होंगे तथा विनिर्माण और निर्यात में वृद्धि को समर्थन मिलेगा। नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलेगा।

यह सुधार किसानों के जीवन में आर्थिकी को मजबूती प्रदान करेगा। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, रोटावेटर में अलग-अलग तरह के जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत की गई है। यह किसान के लिए लागत सक्षम कृषि में सहायक होगी। जैव-कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर जीएसटी दर घटाई गई है।

स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा उत्पादों पर कर समाप्त करने का लाभ सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है। यह कर छूट सभी के लिए बीमा का लक्ष्य पाने में मददगार होगा। सस्ते इलाज के संदर्भ में यह कदम ऐतिहासिक है।

इसके अलावा अपवाद के रूप में जहां स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले उत्पादों पर 40 प्रतिशत कर आरोपित किया गया है, वहीं बीड़ी को 18 प्रतिशत के स्लैब में ही रखा गया है। इससे भविष्य में तेंदू पत्ता संग्राहकों को काफी लाभ होगा। जनजातीय क्षेत्र में तेंदू पत्ता जैसे लघु वन्य उत्पादों की मांग अधिक बढ़ेगी, इससे प्रदेश को भी काफी लाभ होगा।

छत्तीसगढ़ को आर्थिक सुधार और शानदार प्रबंधन के लिए केवल प्रोत्साहन राशि के मद में 6200 करोड़ रुपए मिले हैं। यह प्रोत्साहन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किए श्रेष्ठ आर्थिक प्रबंधन का उदाहरण है।

मोदीजी स्वयं लम्बे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं. इस कारण वे राज्यों की समस्याओं से अवगत हैं। उन्होंने हमेशा से राज्यों की चिंता की है। प्रधानमंत्री बनते ही मोदीजी ने केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 32 प्रतिशत से बढ़ा कर 42 प्रतिशत कर दिया था। अभी कोरोना के बाद यह 41 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ की आबादी देश की जनसंख्या का दो प्रतिशत से भी कम है लेकिन इस मद में हमें 41 प्रतिशत का 3.407 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। इस वृद्धि के कारण पिछले दस ग्यारह वर्ष में हमें एक लाख करोड़ रुपए से अधिक अतिरिक्त मिले हैं।

देश को विकसित बनाने के इस यज्ञ में विपक्ष द्वारा दोहरी राजनीति करना दुखद है। जहां जीएसटी कौंसिल की बैठक में विरोधी दलों की सरकारों के सदस्य टैक्स घटाने का विरोध करते हैं, कहते हैं कि इससे उनके राज्यों को कम पैसे मिलेंगे, वहीं बाहर आ कर वे दल ही यह कहते हैं कि केंद्र सरकार टैक्स लाद रही है, देश के भविष्य से जुड़े ऐसे विषयों पर इस तरह की सस्ती राजनीति उचित नहीं है।

विपक्ष द्वारा यह दुष्प्रचार की इसका अमेरिकन टैरिफ से कोई सम्बंध है, निहायत ही बचकाना और झूठ है। इस सुधार की शुरुआत आज से डेढ़ वर्ष पहले ही हो गयी थी। तब ही इसकी टीम आदि बन चुकी थी और इस पर मंथन हो रहा था। किसी विदेशी गतिविधि का इससे कोई सम्बंध नहीं है।
कांग्रेस इस मामले में भी बुरी तरह कनफ्यूज है। कभी वह इस सुधार का जबरन श्रेय लेना चाहती है, तो कभी इसे गब्बर सिंह टैक्स कह कर इसका मज़ाक़ बनाती है, जबकि जीएसटी अब गुड एंड सिंपल टैक्स हो गया है।
जीएसटी कौंसिल संघ-राज्य संबंध का एक बेहतरीन लोकतंत्रिक मॉडल है जहां सारे निर्णय तीन चौथाई बहुमत से लिए जाने का प्रावधान है और अभी तक इसमें लगभग सभी निर्णय सर्वानुमति से लिए गए हैं। इसमें दो तिहाई वोट राज्यों से होते हैं. सभी राज्यों के वित मंत्री इसके सदस्य होते हैं। केंद्रीय वित मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में बनी यह कॉसिल लोकतंत्रिक संघवाद का एक बेहतरीन मॉडल है। छत्तीसगढ़ से पदेन सदस्य के रूप में वित्त मंत्री ओ पी चौधरी जी ने भी इस सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नया जीएसटी सुधार वास्तव में एक नए क्रांतिकारी आर्थिक युग का सूत्रपात है, इसे हल्की और सस्ती राजनीति का बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन ।

इस प्रेसवार्ता में जिला महामंत्री बृजेश चौहान, राजा देवनानी, निपेन्द्र पटेल, राजा पांडेय, दिनेश रजक, बृजमोहन तिवारी, जयंत अठभेया, अनूप शर्मा, आसिफ शेखानी, दीपंकर रॉय, जयप्रकाश गेडाम, दीपक खटवानी, किशोर हालदार, गोपाल विश्वास, निवास मिस्त्री आदि उपस्थित रहे ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here