The 50th year of Durga Puja will see a unique blend of Karma and Garba dance.
पुसौर / तहसील मुख्यालय पुसौर के सार्वजनिक दुर्गोत्सव का यह 50वां वर्श है जिसमें इसे संपन्न कराने लोगों के एक जुटता एवं लगन इस तथ्य से प्रमाणित होता है कि प्रतिवर्श अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सजावट श्रद्धालुओं को देखने को मिल रहा है। जानकारी के मुताविक इसकी षुरूआत 1975 से हुआ है जिसमें पुसौर ही नहीं बल्कि क्षेत्र के सभी ग्रामों के तात्कालीन गणमान्य एवं जनप्रतिनिधियों का सहयोग रहा। पुसौर के बडे बुजुर्ग बताते हैं कि इसके सुत्रधार स्व. सुर्यदास महाणा आदि लोगों का रहा जिनका आना जाना आये दिन बहार रहता था। रायगढ जिला मुख्यालय को छोडकर सर्वप्रथम 1972 में यह आयोजन सरिया में हुआ जिससे प्रेरित होकर पुसौर में यह आयोजन हुआ। इसमें मुख्यतः तात्कालीन ब्लाक के अधिकारी व सरपंचों ने विषेश रूचि लिया जिसके फलस्वरूप क्षेत्र के तमाम गांव के लोगों की सहभागिता होने से यह आयोजन एक मेले में तब्दील रही। पुजा कार्य के लिये आचार्य के रूप में बरमकेला झनकरपुर के निवासी व आरण्यक ब्राम्हण समाज प्रमुख पं.बाजीराव पंडा वरण हुये थे इनके साथ ही अन्य पंडित के सहयोग से प्रारंभ हुआ था। 50वें वर्श के बिते कलष यात्रा कर्मा नृत्य के रंगारंगा कार्यक्रम के बीच संपन्न हुआ और दुसरे दिन बालिकाओं और युवतियों के दो वर्गो के बीच गरबा नृत्य का आयोजन हुआ। उक्त कार्यक्रम में जहां श्रद्धालुओं ने मां भगवति के स्वरूप के मद्धिम प्रकाष में आनंद उठाया वहीं नाच गानों के प्रेमियों ने कला एवं भाव भंगिमा को देख कर मंत्र मुग्ध हुये। उक्ताषय को लेकर नगर पंचायत उपाध्यक्ष ने बताया कि आयोजित उक्त दुर्गोत्सव में नगर पंचायत के सभी जनप्रतिनिधि एवं आम जनता का विषेश सहयोग रहा है इसलिये सभी कार्यक्रम स्वस्फुर्त ही निर्वाह हो रहे हैं।



