नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, लद्दाख प्रशासन और जोधपुर जेल अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने अपनी याचिका में NSA के तहत इस हिरासत को अवैध बताया है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने इस महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा है।
हिरासत के दस्तावेज़ और कानूनी चुनौती
याचिकाकर्ता गीतांजलि आंग्मो की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में प्रमुख तर्क रखे:
- हिरासत आदेश की कॉपी: सिब्बल ने कहा कि वांगचुक को डिटेंशन ऑर्डर की कॉपी नहीं दी गई है, जिससे वे कानूनी रूप से इसे चुनौती नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि हिरासत से जुड़े दस्तावेज़ उनकी पत्नी को भी दिए जाएं।
- इंटरकॉम पर मुलाकात: सिब्बल ने यह भी बताया कि वांगचुक की अपने भाई और वकील से मुलाकात सिर्फ इंटरकॉम के जरिए करवाई गई है, जो सामान्य मुलाकात नियमों के विपरीत है।
- कानूनी आधार: सिब्बल ने ज़ोर देकर कहा कि कानून के अनुसार, हिरासत में लिए गए व्यक्ति के परिवार को हिरासत के लिखित आधार बताए जाने चाहिए ताकि वे कानूनी चुनौती दे सकें।
सरकार का जवाब और कोर्ट का निर्देश
सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने इसका जवाब देते हुए कहा कि वांगचुक को सभी आवश्यक जानकारी दी गई है और उनके भाई से उनकी मुलाकात भी करवाई गई है।
दस्तावेज़ देने पर विचार: SG मेहता ने कहा कि हिरासत का आदेश बंदी (वांगचुक) को दिया जा चुका है, लेकिन वे उनकी पत्नी को भी इसकी कॉपी देने पर विचार करेंगे, हालांकि उन्होंने आशंका जताई कि बाद में इसे नया आधार बनाकर चुनौती दी जा सकती है। कोर्ट ने सरकार को इस पर सकारात्मक रूप से विचार करने को कहा है।
जेल में मुलाकात: SG मेहता ने कोर्ट को बताया कि पत्नी ने मुलाकात के लिए आवेदन दिया है, जिस पर विचार किया जा रहा है। जस्टिस कुमार ने जोधपुर जेल प्रशासन को जेल नियमों के अनुसार जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया।
दवाओं और आरोपों पर स्पष्टीकरण
दवाओं पर विवाद:
याचिका में यह दावा किया गया था कि सोनम वांगचुक को आवश्यक दवाइयों से वंचित रखा गया है। SG मेहता ने इस दावे को झूठा बताते हुए कहा कि वांगचुक ने खुद मेडिकल ऑफिसर के सामने कहा है कि वह किसी दवा पर नहीं हैं, और यह दावा “मीडिया में भावनात्मक माहौल बनाने” के लिए किया जा रहा है। इसके बावजूद, कोर्ट ने निर्देश दिया कि कैदी को जेल नियमों के अनुसार ज़रूरी मेडिकल सुविधा दी जाए।
क्या है पूरा मामला?
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख में एक बड़े आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। इस आंदोलन की मुख्य माँगे हैं:
- लद्दाख को राज्य का दर्जा देना।
- संविधान की छठी अनुसूची के तहत लद्दाख को विशेष दर्जा देना, ताकि क्षेत्र की ज़मीन, संस्कृति और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
यह आंदोलन हाल के दिनों में उग्र हो गया था, जिसके बाद लद्दाख प्रशासन ने वांगचुक पर गंभीर आरोप लगाए। 26 सितंबर को उन्हें हिरासत में लेकर राजस्थान की जोधपुर जेल भेज दिया गया। उन पर विदेशी शक्तियों के लिए काम करने, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से संपर्क रखने और विदेशों से अवैध चंदा लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वांगचुक की पत्नी ने इन्हीं आरोपों और हिरासत की प्रक्रिया को कोर्ट में चुनौती दी है।



