Two families were tricked into converting under the pretext of curing illnesses. Two families who had converted to Christianity in the village of Navadbari in Narharpur were brought back home by the villagers who welcomed them by tying turbans on their heads.
नरहरपुर । कांकेर जिला के नरहरपुर तहसील अंतर्गत ग्राम नावडबरी में सोमवार को गांव में बैठक हुई। बैठक में प्रमुख पदाधिकारियों एवं ग्राम के प्रत्येक घर के महिला पुरुष की उपस्थिति में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में पारंपरिक रीति रिवाज को संरक्षित रखने के उद्देश्य से गांव में ईसाई समाज से जुड़े व्यक्ति, पादरी, पास्टर को गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय ग्रामवासियों ने की। ग्राम नावडबरी में आदिवासी समाज के दो परिवार ने ईसाई धर्म छोड़कर अपने मूल धर्म में वापसी की। कुछ वर्ष पूर्व मनबहाल वट्टी पिता देशी राम वट्टी खोर बहरीन मतियारा पति सरजू मटियारा, एक पास्टर के बहकावे में आकर ईसाई धर्म अपना चुके थे। लेकिन समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि घर, गांव, समाज और अपनी संस्कृति से बढ़कर कुछ नहीं है। उन्होंने बताया उस समय रोकने या समझाने वाला कोई नहीं था। इसके कारण वे ईसाई प्रार्थना सभाओं में शामिल होने लगे। वहां गांव के देवी-देवताओं, शीतला माता और पारंपरिक पूजा पद्धति को न मानने और केवल ईसा मसीह पर विश्वास करने का दबाव बनाया जाता था, जिससे गांव में विवाद की स्थिति बनी रहती थी। गांव के जनप्रतिनिधियों, समाज प्रमुखों और ग्रामवासियों के प्रयास से उनकी घर वापसी कराई गई। परंपरागत विधि-विधान से ग्राम गायता, पटेल, मांझी मुखिया ने उन्हें पुन गांव की व्यवस्था में शामिल किया। इस अवसर पर भूतपूर्व सरपंच मायाराम मांडवी, युवक समिति अध्यक्ष नोमेश कुमार सुरोजिया खेदूराम सरोजिया ग्राम पटेल वरिष्ठ नागरिक कुमार नेताम, अनुक नेताम, चैनसिंग मंडावी, गम्मू राम साहू, भारत विश्वकर्मा आदि उपस्थित रहे।



