Public anger is rising due to new revelations at the public hearing of Maa Mangala Ispat.
पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट में 36 संवेदनशील वन, 26 स्कूल, कई अस्पताल और धार्मिक स्थल दर्ज होने से चिंता गहराई
रायगढ़ / मां मंगला इस्पात प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित परियोजना को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। हमारे द्वारा पूर्व में प्रकाशित रिपोर्ट में जहां प्रदूषण, जलसंकट और भूमि दोहन की आशंका को लेकर जनसुनवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे, वहीं अब ईआईए अर्थात पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट की विस्तृत प्रतिलिपि सामने आने के बाद ग्रामीणों का विरोध और उग्र हो गया है। ईआईए रिपोर्ट में दर्ज संवेदनशील स्थलों, वन क्षेत्रों, स्कूलों, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों ने ग्रामीणों में और अधिक असंतोष पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह परियोजना सामाजिक, पर्यावरणीय और जनजीवन के लिए अत्यधिक हानिकारक सिद्ध होगी।
ईआईए पर्यावरण प्रभाव आकंलन रिपोर्ट में दर्ज प्रमुख वन क्षेत्र

परियोजना के 7 से 10 किलोमीटर दायरे में गढड़ोंगरी आरक्षित वन, केराडुंगरी संरक्षित वन, जामझरिया संरक्षित वन, खारूदलदली संरक्षित वन, बरखाचर आरक्षित वन, जूनवानी और छिरवानी संरक्षित वन, बर्लिया संरक्षित वन, डूंगापानी वन क्षेत्र, दनोत और नवागांव, धूमाबहाल गांवों के पास स्थित वन सहित कुल &6 से अधिक संरक्षित और आरक्षित वन दर्ज किए गए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि इतने विशाल वनक्षेत्रों की मौजूदगी के बाद भी औद्योगिक परियोजना को आगे बढ़ाना जैव विविधता और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
रिपोर्ट में दर्ज शिक्षण और स्वास्थ्य संस्थान
ईआईए रिपोर्ट में 26 से अधिक शिक्षण संस्थानों और पांच प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों का उल्लेख है। इनमें राजकीय कॉलेज ऑफ एजुकेशन रायगढ़, कृषि महाविद्यालय कोड़तराई, हायर सेकेंडरी स्कूल कोरातलिया, रेणुका इंग्लिश मीडियम स्कूल, सरकारी उ‘चतर माध्यमिक विद्यालय तिलंगा, राजकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय नटवरपुर, नई गढ़ और अन्य कई स्कूल शामिल हैं। ग्रामीणों ने इसे ब‘चों के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा कि औद्योगिक गतिविधि से वायु और ध्वनि प्रदूषण बढऩे का सीधा असर स्कूली ब‘चों पर पड़ेगा।
धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल भी खतरे की जद में
रिपोर्ट में शिव मंदिर, श्री श्री शक्तिपीठम महालक्ष्मी मंदिर, मां मनकेसरी मंदिर, मां बंजारी मंदिर, समलेश्वरी मंदिर, मनकामेश्श्वर मंदिर, हनुमान मंदिर, जग्गनाथ मंदिर सहित कई धार्मिक क्षेत्रों का उल्लेख है। ये सभी 4.86 किलोमीटर से 9.75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। ग्रामीणों ने चिंता जताई कि प्रदूषण बढऩे से धार्मिक वातावरण प्रभावित होगा और परंपरागत सांस्कृतिक माहौल को नुकसान पहुंचेगा।
गांवों में बैठकें तेज, आंदोलन की रणनीति पर मंथन
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जनसुनवाई निष्पक्ष नहीं हुई या आपत्तियों को दर्ज कर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन का बड़ा रूप देने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि ईआईए रिपोर्ट में दर्ज तथ्य स्वयं साबित करते हैं कि यह परियोजना पुनर्विचार योग्य है और इसे रोके बिना पर्यावरण और जनजीवन को गंभीर हानि होगी।
ग्रामीणों का आरोप: प्रशासन कंपनी का पक्ष ले रहा है, आपत्तियां दबाई जा रही हैं
ग्रामीणों ने कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य जनता की राय को सुनना है, परंतु प्रशासन पहले से ही कंपनी की ईआईए रिपोर्ट को बिना ठोस आपत्तियों के परीक्षण के स्वीकारते हुए आगे बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में संवेदनशील स्थल पाए जाने के बावजूद जनसुनवाई की तारीख बढ़ाकर औपचारिकता निभाने की तैयारी की जा रही है। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया जनमत की उपेक्षा कर कंपनी हित में ढाली जा रही है।



