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फोर्टिफाइड चावल के उपभोग से जुड़े मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने से मिलेगा लाभ

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Benefits of consuming fortified rice can be achieved by dispelling myths and misconceptions.

पोषण सुरक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता

Ro.No - 13672/156

छत्तीसगढ़ में चावल फोर्टिफिकेशन पर राज्य स्तरीय कार्यशाला संपन्न

रायपुर / राज्य शासन कुपोषण से लड़ने और राज्य में फोर्टिफाइड चावल के उपभोग को बढ़ावा देने निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य में पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम और समाज कल्याण फाउंडेशन के सहयोग से गत दिवस मेफेयर लेक रिज़ॉर्ट, रायपुर में चावल फोर्टिफिकेशन पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ष्पोषण प्रथमष् जागरूकता अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसे विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा छत्तीसगढ़ में लागू किया जा रहा है।

श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले, सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की निदेशक डॉ. फरिहा आलम ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम की तकनीकी सहायता से विभाग चावल फोर्टिफिकेशन पर नवंबर 2020 से कार्य कर रहा है और अब इसके परिणाम दिखाई देने लगे हैं। आम जन फोर्टिफाइड चावल के उपभोग के महत्व को समझने लगे हैं। यह कार्यशाला प्रतिभागियों को फील्ड स्तर के प्रश्नों को जानने-समझने और फोर्टिफाइड चावल के उपभोग से जुड़े मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने में सहायक होगी।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की सहायक प्राध्यापक डॉ. शुभा बनर्जी ने कार्यशाला में चावल फोर्टिफिकेशन की ष्क्या, क्यों, कहाँ, कैसे और कब पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं में एनीमिया की उच्च दर अपर्याप्त पोषण का परिणाम है। फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति और खपत भी एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत एनिमिया दूर करने की प्रमुख रणनीतियों में शामिल है और इससे एनीमिया में कमी आयी है।

विश्व खाद्य कार्यक्रम के सीनियर प्रोग्राम एसोसिएट श्री अरुणांशु गुहाठकुरता ने छत्तीसगढ़ में चावल फोर्टिफिकेशन पर डब्लूएफपी की भूमिका पर जानकारी दी। उन्होंने कार्यक्रम के विकास, तकनीकी सहायता इकाई इकाई की स्थापना और फोर्टिफाइड चावल के उपयोग के संबंध में जागरूकता अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के उप संचालक एवं बाल स्वास्थ्य एवं नोडल अधिकारी डॉ. वी.आर. भगत, ने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम में विभाग का प्राथमिक फोकस आईएफए सप्लीमेंटेशन प्रदान करना है। खाद्य विभाग द्वारा फोर्टिफाइड चावल शुरू करने की पहल अत्यंत सराहनीय है, जिससे एनीमिया में कमी आई है। कार्यशाला के बाद प्रतिभागियों की जिम्मेदारी होगी कि वे सीखी हुई बातों को समुदाय स्तर पर ले जाएँ और फोर्टिफाइड चावल के उपभोग को बढ़ावा देने तथा मिथकों को दूर करने के लिए लोगों को जागरूक करें।

कार्यशाला में संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम की प्रमुख डॉ. सारिका यूनुस ने विभिन्न राज्यों के सफल केस स्टडी की जानकारी दी। कार्यशाला में विषय विशेषज्ञो की पैनल चर्चा भी आयोजित की गई जिसमें फोर्टिफाइड चावल से जुड़े विभिन्न मिथकों एवं भ्रांतियों पर चर्चा की।

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