A one-day awareness and training workshop was organized in the forest division for snakebite prevention.
धरमजयगढ़ में सर्पदंश सुरक्षा की सीख, जंगल से जनजीवन तक जागरूकता की पहल
रायगढ़ । रायगढ़ जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में सर्पदंश की घटनाओं को रोकने और सांपों के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वनमंडल धरमजयगढ़ द्वारा शुक्रवार को काष्ठागार परिसर में एक दिवसीय जनजागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में सर्पदंश से बचाव, क्षेत्र में पाए जाने वाले विषैले एवं अविषैले सांपों की पहचान, रेस्क्यू प्रक्रियाएं, संरक्षण पद्धतियाँ तथा चिकित्सकीय उपचार संबंधी विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में धरमजयगढ़ एवं लैलूंगा विकासखंड के डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, हाथी मित्र दल, ट्रैकर, वन अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, मीडिया कर्मी, स्वयंसेवी, नोवा नेचर वेल्फेयर टीम एवं आम नागरिक उपस्थित थे।
मुख्य अतिथियों एवं विशेषज्ञों ने क्षेत्र में होने वाली अकाल मृत्यु को रोकने के लिए जागरूकता को सबसे बड़ा हथियार बताया। वन मंडलाधिकारी श्री जितेंद्र कुमार उपाध्याय ने सरल भाषा में सर्पदंश से बचाव के उपायों, सांपों के संरक्षण और त्वरित सूचना तंत्र की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वन विभाग क्षेत्र में सर्पदंश की घटनाओं को लेकर गंभीर है और भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे।
नोवा नेचर वेल्फेयर के श्री एम. सुरज ने सांपों की विभिन्न प्रजातियों, उनके स्वभाव और मानव-सांप संघर्ष के कारणों को समझाया तथा उचित रेस्क्यू तकनीकों की जानकारी दी।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के डॉ. शर्मा ने सर्पदंश के बाद अपनाए जाने वाले चिकित्सकीय उपचार, प्राथमिक उपचार, एंटीवेनम की प्रक्रिया तथा अस्पताल तक त्वरित पहुँच के महत्व पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम में स्थानीय मितानिन श्रीमती सुकवारा साहू ने अपने अनुभव साझा करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश से बचाव और जनजागरूकता के अपने प्रयासों के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों के लिए प्रश्नोत्तरी, वीडियो प्रस्तुति एवं प्रेजेंटेशन के माध्यम से सांपों से संबंधित वैज्ञानिक और व्यावहारिक जानकारी सरल भाषा में साझा की गई।
समापन सत्र में वन विभाग ने कहा कि धरमजयगढ़ वनमंडल सर्पदंश से होने वाली मृत्यु रोकने, सांपों के संरक्षण और जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेगा।
इस अवसर पर संयुक्त वनमंडलाधिकारी श्री बालगोविंद साहू, श्री मकर लाल सिदार, नगर पंचायत धरमजयगढ़ के अध्यक्ष श्री अनिल सरकार, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री शिशुपाल गुप्ता, श्री भरत लाल साहू, श्री गोकुल यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।
बॉक्स समाचार
वन मंडलाधिकारी श्री जितेंद्र कुमार उपाध्याय ने बताया कि धरमजयगढ़ वनमंडल द्वारा सर्पदंश की घटनाओं को रोकने, सांपों के संरक्षण और जनजागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान भविष्य में भी लगातार जारी रहेगा।
सर्पदंश से बचाव के प्रमुख उपाय
घर के आसपास साफ–सफाई रखें, झाड़ियों व कचरे का ढेर न लगने दें। रात में घर के बाहर निकलते समय टॉर्च का उपयोग करना चाहिए। पैर में जूते पहनें, हाथ-पैर झाड़ियों में बिना देखे न डालें। सांप दिखने पर मारने का प्रयास न करें, तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचित करें।
सर्पदंश होने पर क्या करें
सर्प काटने पर सर्प दंश से पीड़ित व्यक्ति को शांत रखें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएँ। प्रभावित अंग को न कसें, न काटें और न दवाइयाँ,झाड़-फूँक करें अस्पताल में उपलब्ध एंटीवेनम ही एकमात्र प्रभावी इलाज है।
इस क्षेत्र में आमतौर पर पाए जाने वाले मुख्य विषैले सांप
कार्यशाला में बताया गया कि इस क्षेत्र में अनेक जहरीले सिर्फ पाए जाते हैं, जिसमें करैत, कोबरा, रसेल वाइपर
और सॉ-स्केल्ड वाइपर है।



