10 lakh zonal tender dispute in Kanker Rural Mechanical Services Department
बाहरी ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के मकसद से नियम लगा कर स्थानीय ठेकेदार को कर दिया गया रिजेक्ट
इंजीनियर अनिवार्यता के नियम पर ठेकेदारों ने उठाए सवाल, अन्य जिलों से तुलना पर बढ़ी नाराजगी
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कांकेर। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग (RES) द्वारा जारी किए गए 10 लाख रुपये के जोनल विद्युतीकरण टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कोयलीबेडा, चारामा और नरहरपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले विभिन्न पंचायतों में विद्युतीकरण कार्यों के लिए लगाए गए इस जोनल टेंडर में इंजीनियर होना अनिवार्य कर दिया गया है। ठेकेदारों का कहना है कि यह नियम अव्यवहारिक, अनावश्यक और विभागीय मनमानी का उदाहरण है, क्योंकि गांवों में होने वाले ये कार्य सामान्यत: 3 लाख से कम राशि के होते हैं और इनमें इंजीनियर की आवश्यकता ही नहीं होती।
ठेकेदारों ने बताया कि विद्युत कार्य के लिए ऊर्जा विभाग औपचारिक रूप से लाइसेंस जारी करता है और तार मिस्त्री परीक्षा पास करने के बाद ठेकेदार खुद बी-वर्ग का रजिस्ट्रेशन ले सकते हैं। ऐसे में जो ठेकेदार स्वयं लाइसेंसीकृत तार मिस्त्री हैं, उन्हें किसी इंजीनियर की आवश्यकता नहीं पड़ती। फिर भी RES विभाग ने अचानक इंजीनियर अनिवार्य करके स्थानीय छोटे ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर करने का रास्ता बना दिया है।
इस नियम से नाराज ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि कांकेर के कार्यपालन अभियंता विजय कुमार माड़वे और तकनीकी कर्मचारियों ने जानबूझकर ऐसा प्रावधान लागू किया, ताकि बाहरी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा सके। आरोप यह भी है कि कुछ ठेकेदारों के साथ साठगांठ कर यह नियम तैयार कराया गया ताकि टेंडर खोलने के समय स्थानीय ठेकेदारों को डिस्क्वालिफाई किया जा सके।
ठेकेदारों के अनुसार शेष जिलों में RES के जोनल टेंडर में इंजीनियर की कोई अनिवार्यता नहीं होती है। लेकिन केवल कांकेर जिले में अलग तरह के नियम लागू किए गए हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब इस संबंध में कार्यपालन अभियंता से पूछा गया कि कांकेर में ही ऐसा नियम क्यों बनाया गया है, तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इससे स्थानीय ठेकेदारों की शंका और गहरी हो गई है कि विभागीय स्तर पर कोई विशेष लाभ पहुंचाने की मंशा से नियम लागू किए गए हैं।
ठेकेदारों ने यह भी कहा कि पंचायत क्षेत्र में होने वाले छोटे-छोटे विद्युतीकरण कार्य इंजीनियर की निगरानी के बिना भी आसानी से किए जा सकते हैं, क्योंकि इसके लिए वैध तकनीकी योग्यता तार मिस्त्री लाइसेंस के रूप में निर्धारित है। फिर भी विभाग द्वारा इंजीनियर अनिवार्य कर देना नियमों, वास्तविक जरूरतों और व्यावहारिकता के विरुद्ध है। इस नियम के कारण कई स्थानीय पात्र ठेकेदारों को टेंडर से बाहर कर दिया गया है, जिससे जिले के भीतर असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।
स्थानीय ठेकेदारों ने शासन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि कांकेर जिले में लागू किए गए इस विवादित प्रावधान की जांच कराई जाए और टेंडर शर्तों को अन्य जिलों की तरह सामान्य और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि स्थानीय युवाओं, तकनीकी दक्ष लोगों और पंजीकृत ठेकेदारों को उनका उचित हक मिल सके।
सूत्रों के अनुसार यह मामला जल्द ही जिला स्तर पर शिकायत के रूप में भेजा जा सकता है, जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया पर बड़ा निर्णय हो सकता है। फिलहाल पूरा मामला कांकेर जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।



