An educational trip was made to Ratanpur, the city of ponds.
मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
मुंगेली/लोरमी- ग्रामीण क्षेत्र स्थित नेहा पब्लिक स्कूल छीतापार के बच्चों ने इस वर्ष माँ महामाया मंदिर रतनपुर का दर्शन लाभ लिए और अपनी मनोकामना पूरी करने की मन्नते मांगे एवं खूंटाघाट बांध की भर्मण किया ! भ्रमण में माता रानी की पूजा अर्चना किए साथ ही तालाबों की नगरी रतनपुर की पौराणिक कथा जैसे राजा कलचुरी शासन और विभिन्न प्रकार के ऐतिहासिक जानकारी संकलित किए ! ऊंचे पर्वत पर बसे प्रभु राम की रामटेकरी का भी दर्शन लाभ लिए ! बच्चों ने खूंटाघाट बांध का भी भ्रमण किए ! इस अवसर पर विद्यालय के संचालक सुनील लहरे शिक्षकगण पूजा लहरे, रजनी मोहले, किरण चतुर्वेदी, रूखमणी पात्रे, मोहनिश राज रात्रे और विद्यालय के छात्र छात्राये मुख्य रूप से उपस्थित रहें !
रतनपुर की प्रमुख पौराणिक कथा
रतनपुर की पौराणिक कथाएँ मुख्य रूप से यहाँ के प्राचीन महामाया मंदिर और कलचुरी राजाओं से जुड़ी हैं, जिसमें राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा 11वीं सदी में महामाया देवी की स्थापना और इसे राजधानी बनाने की कहानी है, जो एक शक्तिपीठ भी है, जहाँ देवी सती का दाहिना हाथ गिरा था और इसे मणिपुर, हीरापुर जैसे नामों से भी जाना जाता था, जो छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है।
भक्तो का आकषर्ण का केंद्र गणेश प्रतिमा वृक्षों से सुशोभित इस प्रसिद्ध मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित है । भक्तों का मानना है कि सिद्धिविनायक सच्ची मनोकामनाएं पूरी करते हैं। रतनपुर, अपने प्राचीन मंदिरों, रहस्यमय कथाओं और सांस्कृतिक विरासत के साथ, आध्यात्मिक ज्ञान और ऐतिहासिक अंतर्दृष्टि की तलाश करने वाले यात्रियों को आकर्षित करता है।



