The marriage of Shri Rukmini and Krishna is a symbol of an ideal married life… Deepchand Dubey
मस्तूरी।
मस्तूरी के निकट ग्राम भदौरा में
जयराम लाल राठौर के घर में 22दिसबंर से
श्री मद भागवत ज्ञान यज्ञ कथा का आयोजन चल रहा है
भागवत कथा के वाचक पंडित दीपचंद दुबे जी है
भागवत कथा का मुख्य यजमान जयराम लाल राठौर – श्री मती उर्वशी बाई राठौर है।
छठवें दिन के कथा रुक्मिणी -श्री कृष्ण के विवाह पर प्रकाश डालते
हुए पंडित दीपचंद दुबे जी ने कहा माता रुक्मिणी ने भगवान कृष्ण के दिव्य गुणों से परिचित थी।
इसलिए वह मन ही मन कृष्ण को
पति मान चुकी थीं। रुक्मिणी कृष्ण के भक्त थी। भक्त की पुकार पर भगवान दौड़े चले गये ,और रुक्मिणी जी
को हरण कर उनसे विवाह कर लिया।
दोनों का विवाह प्रेम भक्ति धर्म और आदर्श
दांपत्य जीवन का प्रतीक है। प्रेम का
विजय है।
भागवत कथा की सेवा में जयराम लाल राठौर के
पुत्र -पुत्रवधु रघुनाथ राठौर -श्री मती अंजली राठौर, बैजनाथ राठौर -श्री मती गायत्री राठौर, रामाधार राठौर -श्री मती सुलोचना राठौर लगे हुए है।
गंगा रूपी भागवत कथा एवं भजन सुनने गोवर्धन प्रसाद साहू के साथ आसपास के गांव के लोग भारी संख्या में उपस्थित रहे।



