Home छत्तीसगढ़ हिंदुत्व पूजा नहीं, जीवंत सभ्यता है: डॉ. वर्णिका शर्मा

हिंदुत्व पूजा नहीं, जीवंत सभ्यता है: डॉ. वर्णिका शर्मा

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*बेलादुला में विशाल हिन्दू सम्मेलन, पंच परिवर्तन का आह्वान*

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*समाज को तोड़ने वाली दीमकों को पहचानना होगा: डॉ. वर्णिका शर्मा*

*हर घर में बने राष्ट्रीय कोना, संस्कार से सशक्त होगा समाज*

बेलादुला, रायगढ़ में विशाल हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत मां भारती की वंदना से करते हुए कहा कि हिमालय से हिंद महासागर तक फैले हिंद राष्ट्र में अवचेतन को जागृत करने के लिए ऐसे सम्मेलन अत्यंत आवश्यक हैं। डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि लोगों के मन में यह प्रश्न रहता है कि हिंदू क्या है, जबकि हिंद भूमि ही हिंद राष्ट्र है। हमारे आचार, विचार और संस्कार एक हैं, फिर भी हम स्वयं को सीमित क्यों आंकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि *हिंदुत्व केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सभ्यता और संस्कृति है, जिसकी अभिव्यक्ति भले ही अलग-अलग हो, लेकिन मूल एक ही है।

उन्होंने कहा कि धर्म संस्कार है और हिंदू एक जीवंत सभ्यता है, जिसमें हम तत्वों में भी ममत्व खोज लेते हैं। सभ्यता श्रेणिक हो सकती है, लेकिन संस्कृति अमिट होती है।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने आधुनिक जीवनशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हम “पिक एंड ड्रॉप” वाली संस्कृति के नहीं, बल्कि “पिक एंड चूज़” वाली संस्कृति के हैं, जहाँ केवल अपना काम निकालने की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने की परंपरा है।

उन्होंने समाज को विभाजित करने वाले तत्वों को “दीमक” की संज्ञा देते हुए कहा कि हमें उन दीमकों को पहचानकर हटाना होगा, जो समाज में क्लेश के बीज बोती हैं।

इस अवसर पर उन्होंने समाज के लिए पंच परिवर्तन के पाँच प्रणबताए जिसमें पहला प्रण पर्यावरण संरक्षण,दूसरा प्रण नागरिक कर्तव्य, तीसरा प्रण स्वबोध – स्वयं को पहचानना, स्वदेशी, स्वभाषा और स्वपोष अपनाना और इस संदर्भ में उन्होंने स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के अंतर को समझाते हुए कहा कि स्वभोजन में जो आनंद है, वह किसी अन्य भोजन में नहीं। साथ ही “हर घर में एक राष्ट्रीय कोना” बनाने का आह्वान किया, जिससे इतिहास और संस्कृति की समझ विकसित हो चौथा प्रण समरसता – समान भावना विकसित करना तथा 4R (रिफॉर्म, रिसाइकल, रिड्यूस, री-डेवलप) का संकल्प पांचवां प्रण कुटुंब प्रबोधन – परिवार में “मी टाइम” को “वी टाइम” में बदलना और अपने ग्रंथों को यूट्यूब नहीं, बल्कि अपने पुरखों से जानने की परंपरा को पुनर्जीवित करना।

उद्बोधन के पश्चात डॉ. वर्णिका शर्मा को पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सफाई मित्रों का भी सम्मान किया गया तथा एकता का सामूहिक संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम में बालिका सौम्य ने शिव स्तोत्र पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति दी।

हिन्दू सम्मेलन का समापन मां भारती की आरती के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्वक हुआ।

कार्यक्रम में महिला समन्वय की सह संयोजिका अनुपमा गुप्ता, प्रकाश डडसेना, आनंद सिंह, आत्म सिंह चौहान, ज्योति देवांगन, अनुपम गुप्ता, मंजू अवस्थी, सत्य उपाध्याय, मधु मेहर, सुमन मेहता, सुशीला साव, अनीता ग्वेल, उर्मिला देवांगन, संजू साहू, रीना निषाद, सरोजनी डनसेना, कल्याणी दास, नेम देवांगन, मिथिला पटेल, खंड संयोजिका गायत्री केशरवानी, सुजाता साहू, अमृता सवारियां, स्नेहा तिवारी सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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