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मस्तूरी में छेरछेरा पर्व पर बच्चे-युवा निकले दान मांगने मस्तूरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में दिखा भारी उत्साह

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Children and young people went out to ask for donations during the Cherchera festival in Masturi; great enthusiasm was seen in Masturi and surrounding rural areas.

मस्तूरी में लोक पर्व छेरछेरा धूमधाम से मनाया गया। पौष माह की पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस त्योहार पर बच्चे और युवा सुबह से ही घरों-घर में दान मांगने निकले। लोगों ने उन्हें खुशी-खुशी धान चावल और नगदी दान दिए मस्तूरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही बच्चे और युवा टोलियों में ‘छेरछेरा, माई कोठी के धान ल हेरते हेरा’ कहते हुए घरों के दरवाजे पर पहुंचे। लोगों ने उन्हें प्रसन्नतापूर्वक धान, चावल, दाल या नगदी देकर इस परंपरा का निर्वहन किया।

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यह त्यौहार छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण पारंपरिक त्योहार है, जो धान की फसल के घर आने के बाद मनाया जाता है। यह पर्व किसानों की खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है, जब उनकी मेहनत का फल लक्ष्मी रूपी धान घर पहुंचता है।
मस्तूरी जन प्रतिनिधि प्रकाश अवस्थी रिंकू राठौर ने बताया कि छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ की लोक आस्था और खुशहाली का प्रतीक है। यह त्योहार धान की फसल घर आने पर मनाया जाता है, जिसमें बच्चे और युवा घर-घर जाकर धान चावल या नगदी एकत्र करते हैं।

पौष माह की पूर्णिमा के दिन मनाते है छेरछेरा

प्रकाश अवस्थी रिंकू राठौर ने इस पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छेरछेरा छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है। यह पर्व लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने और समाज में एकता का संदेश देता है, साथ ही बच्चों को अपनी संस्कृति समझने का अवसर प्रदान करता है।

माता सेवा एवं प्रभात मंडली ने मांगा छेरछेरा

छेरछेरा पर्व के दिन बच्चों में काफी उत्साह देखा गया साथ ही मस्तूरी के माता सेवा समिति एवं सुप्रभात मंडली ने मृदंग ,ढोलक मंजीरा झुनकी वाद्य यंत्रों के साथ भजन करते हुए मस्तूरी में छेरछेरा मांगे।
इसमें प्रमुख रूप से प्रकाश अवस्थी,शीतल प्रजापति भोलाराम प्रजापति, राजेश राठौर, हेमंत गुप्ता, संतोष मौर्य भगवान दास, नारायण प्रजापति दल्लू साहू शिव प्रजापति रमेश साहू समर अवस्थी अमर अवस्थी कान्हा अवस्थी जय श्री अवस्थी, एवं भारी संख्या में बच्चे एवं बुजुर्ग शामिल रहे।

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