Advanced technology and subsidies have boosted fish production, leading to an annual income of up to 3 lakhs.
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से बदली हरिशंकर पटेल की तकदीर
आत्मनिर्भर मत्स्य कृषक बनकर अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा
रायगढ़। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ग्रामीण अंचलों में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है। इस योजना का प्रभावी उदाहरण रायगढ़ विकासखंड के ग्राम कलमी निवासी श्री हरिशंकर पटेल हैं, जिन्होंने शासन की योजना का लाभ उठाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की, बल्कि मछली पालन के क्षेत्र में एक सफल और आत्मनिर्भर मत्स्य कृषक के रूप में पहचान स्थापित की है।
लगभग पाँच वर्षों से मत्स्य पालन से जुड़े श्री हरिशंकर पटेल ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत “स्वयं की भूमि में तालाब निर्माण” योजना का लाभ लिया। उन्होंने अपनी निजी भूमि पर 0.607 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तालाब का निर्माण कर वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन की शुरुआत की। सामान्य वर्ग के मत्स्य कृषक होने के कारण उन्हें योजना के अंतर्गत 40 प्रतिशत अनुदान प्राप्त हुआ, जिससे तालाब निर्माण एवं प्रारंभिक व्यवस्थाओं में उल्लेखनीय सहयोग मिला।
मत्स्य पालन विभाग द्वारा उन्हें रोहु, कतला एवं मृगल जैसी उन्नत प्रजातियों के मत्स्य बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए गए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्वयं के संसाधनों से पंगास और रूपचंदा मछली के बीज का संचयन भी किया, जिससे उत्पादन में विविधता आई और आय के नए अवसर सृजित हुए। श्री पटेल प्रतिवर्ष नवंबर से जनवरी के मध्य मत्स्याखेट करते हैं।
बाजार में उनके द्वारा उत्पादित कतला, रोहु एवं मृगल मछलियां 160 से 180 रुपए प्रति किलोग्राम, रूपचंदा 130 रुपए प्रति किलोग्राम तथा पंगास 110 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय होती हैं। बेहतर प्रबंधन, समय पर बीज संचयन एवं वैज्ञानिक पद्धति अपनाने के कारण उनके तालाब से निरंतर उत्कृष्ट उत्पादन प्राप्त हो रहा है।
वर्तमान में श्री हरिशंकर पटेल प्रतिवर्ष लगभग 60 से 70 क्विंटल मछली का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें सालाना 2.50 लाख से 3 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। यह आय न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर जीवन की ओर भी अग्रसर कर रही है।
आज श्री हरिशंकर पटेल प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सफल लाभार्थी के रूप में अन्य मत्स्य कृषकों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि शासन की योजनाओं का सही दिशा में और वैज्ञानिक तरीके से लाभ उठाया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्र में रहकर भी सम्मानजनक आय और स्थायी रोजगार प्राप्त किया जा सकता है।



