Govardhanpur bridge closed, hundreds of transporters in Raigarh facing crisis….
गोवर्धनपुर पुलिया के विगत दो वर्षों से क्षतिग्रस्त होने और उस पर भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध के चलते रायगढ़ जिले के सैकड़ों ट्रांसपोर्टर गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ट्रांसपोर्टरों की गाडिय़ों के पहिए थमे हुए हैं, जिससे उनकी आय पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है और परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
गौरतलब है कि प्रशासन द्वारा गोवर्धनपुर पुलिया पर भारी वाहनों के संचालन पर रोक लगाई गई है, लेकिन इतने लंबे समय बाद भी न तो पुल का निर्माण शुरू हुआ है और न ही कोई सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया गया है। इसी को लेकर ट्रेलर कल्याण संघ, रायगढ़ लगातार प्रशासन से वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की मांग कर रहा है। इसी कड़ी में सोमवार दिनांक 12 जनवरी 2026 को दर्जनों ट्रांसपोर्टर कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे थे, जहां उन्हें केवल आश्वासन देकर लौटा दिया गया। इसके बाद आज फिर सैकड़ों ट्रांसपोर्टरों ने रायगढ़ कलेक्टर से मुलाकात की और अपनी पीड़ा रखी। आज ट्रेलर कल्याण संघ, रायगढ़ द्वारा रायगढ़ कलेक्टर, एसपी एवं यातायात डीएसपी को वैकल्पिक मार्ग की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में बताया गया कि गोवर्धनपुर पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से ट्रेलर चालक, माल परिवहन से जुड़े व्यापारी, उद्योग, मरम्मत कार्य से जुड़े कारीगर और ऑटो पाट्र्स दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जब तक नए पुल का निर्माण पूर्ण नहीं हो जाता, तब तक किसी सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की तत्काल व्यवस्था की जाए, ताकि ट्रेलर एवं अन्य भारी वाहनों का आवागमन सुचारू रूप से हो सके और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां ठप न हों।
इन प्लांटों तक मार्ग अवरुद्ध
पुलिया बंद होने के कारण एम.एस.पी., एंड एनर्जी, शाकंभरी, मां मंगला एवं शिवशक्ति प्लांटों में चलने वाली गाडिय़ों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं। इससे न सिर्फ ट्रांसपोर्टर बल्कि उद्योगों का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।
स्थिति नहीं सुधरी तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
मीडिया से बातचीत में ट्रेलर कल्याण संघ, रायगढ़ के अध्यक्ष सुधीर सिंह ने कहा कि पिछले दो वर्षों से संघ लगातार प्रशासन को ज्ञापन दे रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्टर अब मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। यदि जल्द वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं की गई तो संघ को मजबूरन उग्र कदम उठाने पर विचार करना पड़ेगा।
फिलहाल ट्रांसपोर्टर प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि आखिर कब उनकी समस्या का स्थायी या अस्थायी समाधान निकलता है।



