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पीढ़ापाल क्षेत्र में 25 ग्राम से 75 परिवार के 350 से अधिक ग्रामीणों की मूल धर्म में वापसी, ईसाई धर्मांतरण के तौर-तरीकों पर उठे गंभीर सवाल

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The return of over 350 villagers from 75 families across 25 villages in the Pidapal area to their original faith raises serious questions about the methods used for Christian conversions.

कांकेर के ग्राम पीढापाल में आज एक ऐतिहासिक और आत्मबोध से भरा हुआ दृश्य सामने आया, जब क्षेत्र में 25 ग्राम से 75 परिवार के350 से अधिक ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से अपने मूल धर्म में वापसी की। यह केवल किसी धार्मिक अनुष्ठान की घटना नहीं थी, बल्कि वर्षों से चले आ रहे प्रवंचना, भय, झूठ और प्रलोभन के विरुद्ध आदिवासी समाज की चेतना का उद्घोष था। मूल धर्म में लौटे ग्रामीणों ने बताया कि वे किसी आध्यात्मिक खोज के कारण नहीं, बल्कि बीमारी ठीक होने के दावों, डर और लोभ के माध्यम से किए गए प्रभाव में आकर मतांतरित हुए थे। उन्हें यह कहा गया था कि बाइबिल के आदेशों का पालन करने से बीमारी ठीक हो जाएगी और आदेश न मानने पर बीमारी बनी रहेगी, साथ ही केवल ईसामसीह को मानने का दबाव बनाया गया तथा पारंपरिक देवी-देवताओं को शैतान बताकर उनसे दूरी रखने को कहा गया। ग्रामीणों के अनुसार उनसे हर सप्ताह अपने काम-काज और आजीविका को छोड़कर चर्च जाने को कहा जाता था और यह विश्वास दिलाया जाता था कि ऐसा करने से धन लाभ होगा और जीवन की समस्याएँ समाप्त हो जाएँगी। समय के साथ जब ग्रामीणों को यह समझ में आया कि यह प्रक्रिया केवल धार्मिक नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति, परंपरा और ग्राम समाज की एकता को कमजोर करने वाली है, तब उनके भीतर गहरी ग्लानि और आत्मचिंतन पैदा हुआ और उन्होंने सामूहिक रूप से अपने मूल धर्म में लौटने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने कहा कि सनातन ,आदिवासी संस्कृति सर्वसमावेशी है, जहाँ सभी देवी-देवताओं और परंपराओं का सम्मान है और यही जीवन-दर्शन उनकी पहचान है। इस सामूहिक घर वापसी में ग्राम धनतुलसी, मोदे, साल्हेभाट, कानागांव, बुधीयारमर्रा–टोडामर्का, मांदरी, क्रिस्टीकुर, किरगापाटी, ग्राम पीड़ापल, मुजालगोंदी तथा ग्राम तुलतुली आदि के मतांतरित ग्रामीण शामिल रहे, जिनमें बृजलाल कवाची, सागर मंडावी, कमल सिंह कावड़े, ब्रिजलाल कुंजाम, राजेश नेरेटी, सुखराम नेरेटी, गणेश दुग्गा, भागवत नाग, बेनु राम नाग, शिवचरण पटेल, राहुल पटेल, सुनो नाग, लक्ष्मी पटेल, संतोष निषाद, दुपसिंह कांगे, गंगू राम कुमेटी, जोहन कुमेटी, मोतीराम, भगतराम, छबीलाल, राधेलाल, सरजू, छरकु राम शोरी, देवसिंग नाग, रामदयाल तारम, बृजलाल कावड़े, जयसिंह मड़ावी, संतुराम हुपेंडी, अंकाल कोरेटी, लक्ष्मण उसेंडी, सोगुराम कावड़े, शिवचरण नाग, लीलाबाई कचलाम, संपत कोरेटी, गणेश कोरेटी, आधीन कचलाम, जोहत्रिन शोरी, हीराराम दुग्गा, करण सिंह दर्रो, कुंवर सिंह दर्रो, राधेलाल चक्रधारी, अजय सिंह, गोवर्धन सोनवानी, विष्णु पद्दा, अशोक कावाची, बरातू पोया, गन्नू यादव, रामलाल दुग्गा, शियाशाम नरेटी, जयराम सोनवानी, तुलसी सोनवानी, तिलक मरकाम, सरित मंडावी, श्रीराम नरेटी, अमिता पटेल, सुखिया बाई निषाद, इशू कावड़े, तुलसी हिचामी, दुवारु राम नरेटी, बिरूराम नूरेटी, नरेश यादव, जैनसिंह तारम, सुखराम कावड़े, श्यामलाल विश्वकर्मा, मान सिंह मंडावी, महादेव वट्टी, बिद बाई दुग्गा, दयाराम हिचामी, मनीराम कुमेटी एवं सरिता हिड़को सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। यह घटना पूरे क्षेत्र में धर्मांतरण के तौर-तरीकों को लेकर बढ़ती जागरूकता का संकेत मानी जा रही है।

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धर्मांतरण विरोधी अभियान में सक्रिय सर्व समाज के सदस्य ईश्वर कावड़े ने कहा कि पीढापाल क्षेत्र में हुआ यह घटनाक्रम आदिवासी एवं सर्व समाज की चेतना और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ग्राम समाज अपनी परंपरा, देवी-देवताओं, सामाजिक नियमों और ग्राम सभा की व्यवस्था के प्रति सजग हो रहा है और यही जागरूकता आगे भी अन्य गांवों तक पहुँचेगी। यह अभियान लगातार जारी रहेगा और ग्राम समाज को उसकी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता के प्रति जागरूक करने का कार्य आगे भी किया जाएगा, अवैध धर्मांतरण करने वाले लगातार बेनकाब हो रहे हैं।

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