A concrete road will be constructed on the main road of the mineral-affected area of Chhal, and a new gravel road will be constructed from Hati to Purunga.
लगभग 22 करोड़ रुपए की कार्ययोजना तैयार, सीएसआर एवं डीएमएफ मद के संयुक्त सहयोग से होगा निर्माण कार्य
कलेक्टर ने क्षेत्र भ्रमण कर सुनी ग्रामीणों की मांग, वन मार्ग निर्माण को दी सैद्धांतिक सहमति
सड़क निर्माण से आवागमन सुविधा में होगा सुधार, ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ
रायगढ़, रायगढ़ जिले के खनिज प्रत्यक्ष उत्खनन से प्रभावित क्षेत्र छाल सहित आसपास के अंचलों में सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। लगभग साढ़े चार-पांच किलोमीटर लंबे छाल मुख्यमार्ग के पक्कीकरण के लिए करीब 22 करोड़ रुपए की कार्ययोजना तैयार की गई है। यह निर्माण कार्य जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद और सीएसआर मद के साझा सहयोग से किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप खनिज प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी एवं मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता देते हुए यह कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान छाल के ग्रामीणों ने कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के समक्ष खरसिया से छाल पहुंच मार्ग
के लगभग चार पांच किलोमीटर जो अत्यंत खराब अवस्था में है के नए पक्की सड़क निर्माण की मांग रखी। ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान सड़क जर्जर हो चुकी है, जिससे आवागमन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर कलेक्टर ने ग्रामीणों को अवगत कराया कि सड़क निर्माण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है और इसे प्राथमिकता के आधार पर क्रियान्वित किया जाएगा।
छाल पहुंच मार्ग लंबे समय से खराब स्थिति में था, जिससे किसानों, विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों को परेशानी होती थी। प्रस्तावित पक्की सड़क निर्माण से क्षेत्र में आवागमन अधिक सुगम एवं सुरक्षित होगा।
इसी दौरान हाटी से पुरुंगा तक जंगलों के बीच से गुजरने वाले कच्चे मार्ग को मुरूम सड़क के रूप में विकसित किए जाने की मांग भी ग्रामीणों द्वारा रखी गई। कलेक्टर ने स्थल पर पहुंचकर मार्ग का निरीक्षण किया और सड़कों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने धरमजयगढ़ वन मंडलाधिकारी से दूरभाष पर चर्चा कर आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करते हुए मार्ग निर्माण की दिशा में कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश दिए तथा सैद्धांतिक सहमति प्रदान की।
ग्रामीणों ने बताया कि यह वनांचल क्षेत्र का प्रमुख संपर्क मार्ग है। मुख्य पक्की सड़कों से जाने पर दूरी अधिक पड़ती है, जबकि इस जंगल मार्ग से समय और श्रम दोनों की बचत होती है। किसान हाटी और छाल आने-जाने के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते हैं, वहीं स्कूली बच्चे भी विद्यालय पहुंचने के लिए इसी रास्ते से गुजरते हैं। वर्तमान में सड़क अत्यंत खराब स्थिति में है और यह क्षेत्र हाथी विचरण क्षेत्र के रूप में चिन्हांकित है, ऐसे में मुरूम सड़क निर्माण से स्थानीय नागरिकों को राहत मिलेगी।



