Home Blog भक्त प्रह्लाद चरित्र और नरसिंह अवतार की कथा सुनाया श्रद्धेय राधेश्याम शास्त्री

भक्त प्रह्लाद चरित्र और नरसिंह अवतार की कथा सुनाया श्रद्धेय राधेश्याम शास्त्री

0

जांजगीर। जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पुटपुरा (गांजर पारा) में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के तीसरे दिन भक्त प्रह्लाद चरित्र, भरत चरित्र, हिरण्यकश्यप वध एवं भगवान के नरसिंह अवतार की मार्मिक कथा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। कथा व्यास आचार्य श्रद्धेय राधेश्याम शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब मनुष्य आनंद की तल्लीनता में डूब जाता है, तब पाप उसका स्पर्श तक नहीं कर पाता। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ऐसा अमृत है, जिसका जितना अधिक रसपान किया जाए, मन उतना ही अधिक तृप्ति की अनुभूति करता है।

कथावाचन के दौरान आचार्य शास्त्री ने हिरण्यकश्यप की कठोर तपस्या का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि दैत्यराज ने घोर तप कर ब्रह्माजी को प्रसन्न किया। ब्रह्माजी के प्रकट होने पर हिरण्यकश्यप ने वरदान मांगते हुए कहा कि उसकी मृत्यु न दिन में हो, न रात में; न घर के भीतर, न बाहर; न किसी अस्त्र-शस्त्र से, न अग्नि से, न जल में डूबकर—अर्थात वह अजर-अमर हो जाए। ब्रह्माजी ने उसे वरदान प्रदान किया।

Ro.No - 13672/156

इसके बावजूद हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त बना रहा। पिता द्वारा विष्णु को शत्रु मानने और पुत्र की भक्ति से क्रोधित होकर उसे अनेक यातनाएं दी गईं। अंततः जब हिरण्यकश्यप ने क्रोध में आकर प्रह्लाद को मारने के लिए तलवार उठाई, तब महल का खंभा फट गया और उसी स्तंभ से भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण कर प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का संहार किया। नरसिंह का स्वरूप अद्भुत था—मुख सिंह का और धड़ मानव का। इस प्रसंग का वर्णन सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

प्रतिदिन प्रातः 8 बजे दैनिक वेदी पूजन भी संपन्न किया जा रहा है। पूजन विधि पंडित चंद्र प्रकाश पाण्डेय के निर्देशन में सहयोगी राहुल तिवारी एवं राजा तिवारी द्वारा कराई जा रही है। आयोजन में शीतला महिला सेवा समिति की सक्रिय भागीदारी रही।

मुख्य यजमान के रूप में शीतल यादव, चंद्रकला यादव, लता राठौर, हीलम राठौर, रामबाई, पुष्पा श्रीवाश, पूजा राठौर, अनीता यादव, गायत्री बरेठ, रमा बरेठ, दरस चौहान, रामकुमारी यादव, गंगा बरेठ, कमला यादव, सरिता नेताम सहित समस्त ग्रामवासी उपस्थित रहे और कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here