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प्रदेश स्तरीय बैठक में मुंगेली जिले के पदाधिकारी हुवे शामिल,

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मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट

मुंगेली/लोरमी -छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ की प्रदेश स्तरीय बैठक शनिवार को एक निजी होटल रायपुर में प्रदेश अध्यक्ष सुबोध राठी, प्रदेश सचिव मनोज पांडे के अध्यक्षता में आयोजित की गई थी !बैठक में प्रदेश के 15 जिले के पदाधिकारी उपस्थित रहे जिसमें मुंगेली जिला के प्रतिनिधि मंडल जिला अध्यक्ष नर्बद कश्यप,पूर्व जिला अध्यक्ष मनोहर यादव, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष सुनील लहरें जिला सचिव सोमनाथ बंजारे पथरिया ब्लॉक अध्यक्ष गौकरण जायसवाल मुख्य रूप से शामिल हुवे !

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बैठक का शुभारंभ भारत माता एवं सरस्वती माता के तेल चित्र पर पूजन अर्चन एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया।

अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुबोध राठी ने विगत एक वर्ष में संगठन के द्वारा निजी विद्यालय के विभिन्न समस्याओं के निराकरण एवं उनके हित संवर्धन के लिए किए गए कार्यों के बारे में विस्तार से बताया । ।उन्होंने कहा कि प्रदेश में शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने संगठन विगत कई वर्षों से मांग कर रहा था कि प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर पर बोर्ड परीक्षा आयोजित की जाए, जो की पूर्ण हुई और 5 वीं,8 वीं केन्द्रीय कृत परीक्षा लेने का फैसला छत्तीसगढ़ सरकार ने ली जिसके लिए विष्णु के सुशासन विष्णु देव साय सरकार के प्रति आभार जताया और फेल पास करने की ब्यवस्था की मांग किया !

राठी ने बताया कि हमारे संगठन को बने मात्र एक वर्ष होने जा रहा है और इस एक वर्ष में ही हमने अपने विभिन्न मांगो को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव सहित सभी प्रमुखों के साथ सतत संवाद स्थापति कर हमने विद्यालय एवं विद्यार्थियों के हित में अनेक कार्य किए हैं।

बैठक में अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के सचिव मनोज पाण्डेय, उपाध्यक्ष अजय कुमार दुबे, जितेंद्र तिवारी, विशंभर साहू, सह सचिव अक्षय कुमार दुबे,सहसचिव पारखदास मानिकपुरी,कोषाध्यक्ष विनोद कुमार पाण्डेय,तरुण भांडे अध्यक्ष धमतरी, राजेश सोनी अध्यक्ष बालोद,नरबद कश्यप अध्यक्ष मुंगेली ने भी सम्बोधित किया ! कार्यक्रम का संचालन जांजगीर चांपा जिले के सचिव आलोक शुक्ला और आभार प्रदेश अध्यक्ष ने किया !

बैठक में सभी सदस्यों ने विभिन्न शैक्षणिक समस्याओं पर चर्चा करते हुए शासन से आधोलिखित मांगे की है

पहला मांग आरटीई के तहत प्रवेश की आरंभिक कक्षा नर्सरी, केजी वन और कक्षा पहली हेतु पूर्व वर्षों के समान होना चाहिए। वर्तमान एन ई पी के तहत भी प्रारंभिक कक्षा नर्सरी निर्धारित की गई है। सरकार द्वारा ली गई फैसला जिसमें कक्षा पहली में आर टी इ के तहत सीधा प्रवेश से पूर्व में अध्ययन रत विद्यार्थी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे तथा ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या बढ़ेगा और कक्षा नर्सरी केजी वन में गरीब असहाय वर्ग के पात्र बच्चे निःशुल्क शिक्षा से वंचित हो जायेंगे !

दूसरा मांग आरटीई में प्रवेश के नियम के तहत 1 कि.मी. एवं 3 कि.मी. की दूरी में मूल निवासियों को ही पात्रता मिलनी चाहिए। जिसमें किरायानामा या अन्य एफिडेविट स्वीकार नहीं हो जिससे आसपास के बच्चे प्रवेश लेंगे जिससे बच्चे ड्राप्ट आउट नहीं होंगे ।
तीसरा मांग . विगत कई वर्षों से R.T.E. के तहत अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की प्रतिपूर्ति की राशि में वृद्धि नहीं हुई हैं और मॅहगाई दर में काफी वृद्धि हुई हैं इसलिए आरटीई के तहत अध्यनरत विद्यार्थियों की प्रतिपूर्ति की राशि प्राथमिक स्तर तक पंद्रह हजार रुपये, पूर्व से माध्यमिक स्तर तक बीस हजार रुपये और उच्चतर माध्यमिक स्तर तक पचीस हजार रुपये होना चाहिए।

चौथा मांग सत्र 2025-26 की प्रवेश प्रक्रिया के दौरान ई-केवाईसी एवं आधार की व्यवस्था में नवीन प्रावधान किया जाए। बिना आधार के प्रवेश नहीं होना चाहिए आधार कार्ड की अनिवार्यता होनी चाहिए और तत्काल पोर्टल में सुधार हो !

पांचवा मांग छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल के द्वारा बोर्ड परीक्षा आदि की विलम्ब शुल्क प्रति दिवस 1000/- रुपये की अनावश्यक वृद्धि को तुरंत निरस्त किया जाए।

. छठवाँ मांग शासकीय विद्यालयों में प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक स्तर में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को विद्यालयों में कार्यरत प्रधान पाठकों के द्वारा टी सी पालकों को न देकर सीधे उसी ग्राम या शहर के अन्य शासकीय पूर्व माध्यमिक या हाई स्कूल में सीधे प्रदान कर दी जाती है, जो कि गलत है। इस पर तत्काल रोक लगाई जाए। पालकों को अपनी इच्छानुसर किसी भी विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने की स्वतंत्रता दी जाये ।

सातवां मांग बिना टी.सी. किसी भी बच्चों का किसी भी शासकीय या अशासकीय विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाये !

आठवाँ मांग सरकार द्वारा अशासकीय विद्यालयो को दी जाने वाली आर टी इ प्रतिपूर्ति की राशि शिक्षण सत्र समाप्ति के पूर्व मिलनी चाहिए और सत्र 2025-26 में अपार आईडी होने पर ही भुगतान करने की अनिवार्यता को समाप्त किया जाय और आने वाले सत्र से लागू किए जाने की मांग किए !

नौवीं मांग विगत वर्ष पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा पुस्तक वितरण में काफी अनियमितता बरती गई जिसके कारण आज पर्यंत प्रदेश के हजारों बच्चों को पुस्तके नहीं मिल पाई हैं उनकी लापरवाही का खामियाजा छत्तीसगढ़ के अबोध बच्चे भुगत रहे हैं जिन्होंने पूरे वर्ष बगैर पुस्तक के ही पढ़ाई की है।आने वाले वर्ष शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के पूर्व सभी विद्यालयों को संकुल स्तर पर पुस्तके पहुंचाकर प्रदान की जाए और यदि पाठ्य पुस्तक निगम सक्षम न हो तो बच्चों को खुले बाजार से पुस्तके क्रय करने की व्यवस्था बनाई जाए।

प्रदेश सचिव मनोज पांडे ने कहा कि
उपरोक्त समस्त मांगो को लेकर शीघ्र ही प्रतिनिधि मंडल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से भेंट करेंगे !
बैठक में रायपुर,धमतरी, बालोद, बलौदाबाज़ार,सारंगढ़, कोरबा, जांजगीर चाम्पा कोरिया,सूरजपुर,कवर्धा,बेमेतरा, मुंगेली, कांकेर,गरियाबंद सहित 15 जिलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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