814.5 करोड़ की औद्योगिक परियोजना पर उठे सवाल…

जिले के गढ़उमरिया और दर्रामुड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित 814.5 करोड़ रुपये की विशाल औद्योगिक विस्तार परियोजना को लेकर ग्रामीणों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। मेसर्स रुंगटा संस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपने मौजूदा फेरो अलॉय संयंत्र के विस्तार के लिए पर्यावरणीय मंजूरी मांगी गई है। कंपनी की योजना एकीकृत इस्पात संयंत्र तथा 50 मेगावाट क्षमता के कैप्टिव पावर प्लांट के रूप में स्थापित करने की है।
पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) एवं पर्यावरण प्रबंधन योजना (EIP) दस्तावेजों के अनुसार वर्तमान में 2.513 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित संयंत्र का विस्तार कर कुल 11.029 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। परियोजना में फेरो अलॉय उत्पादन क्षमता को 42,900 टन प्रतिवर्ष करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त 2.145 लाख टन प्रतिवर्ष क्षमता का डीआरआई संयंत्र, 2.24 लाख टन प्रतिवर्ष स्टील मेल्टिंग शॉप, 2 लाख टन प्रतिवर्ष रोलिंग मिल, 200 टन प्रतिदिन सिंटर प्लांट, 10 टन प्रति घंटा मेटल रिकवरी यूनिट, 15 टन प्रति घंटा रीहीटिंग फर्नेस तथा 50 मेगावाट क्षमता का कैप्टिव पावर प्लांट स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना स्थल राष्ट्रीय राजमार्ग-49 के समीप स्थित है। रायगढ़ रेलवे स्टेशन इसकी दूरी लगभग पांच किलोमीटर तथा झारसुगुड़ा हवाई अड्डा करीब 65 किलोमीटर दूर बताया गया है।
प्रदूषण और भूजल पर बढ़ सकती है चिंता
परियोजना के सार्वजनिक दस्तावेज सामने आने के बाद क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि रायगढ़ जिला पहले से ही बड़ी संख्या में उद्योगों और ताप विद्युत संयंत्रों के कारण वायु प्रदूषण, राख और औद्योगिक अपशिष्ट की समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में स्टील, डीआरआई और फेरो अलॉय उत्पादन क्षमता में बड़े विस्तार से पर्यावरणीय दबाव और बढ़ सकता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार डीआरआई, स्टील मेल्टिंग और फेरो अलॉय जैसी इकाइयों से धूलकण, फ्लाई ऐश, धात्विक कण तथा अन्य औद्योगिक अपशिष्ट उत्पन्न होते हैं, जिनका प्रभाव आसपास के गांवों की वायु गुणवत्ता, कृषि भूमि और जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
जनसुनवाई से पहले गांवों में बैठकों का दौर
प्रस्तावित परियोजना की जनसुनवाई को लेकर गांवों में बैठकों और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लोगों का कहना है कि कंपनी को यह स्पष्ट करना होगा कि संयंत्र की प्रतिदिन जल आवश्यकता कितनी होगी, भूजल या अन्य जल स्रोतों का उपयोग किस प्रकार किया जाएगा, राख और स्लैग का निपटान कैसे होगा तथा प्रदूषण नियंत्रण के लिए कौन-कौन सी तकनीकें अपनाई जाएंगी।
लोग यह भी जानना चाहते हैं कि परियोजना से स्थानीय लोगों को रोजगार, सामाजिक विकास और अन्य प्रत्यक्ष लाभ किस स्तर पर प्राप्त होंगे।
परियोजना एक नजर में
कंपनी रुंगटा संस प्राइवेट लिमिटेड गढ़उमरिया-दर्रामुड़ा, रायगढ़ में बताया जा रहा है कि इसके लिए कुल निवेश – 814.5 करोड़ रुपये, कुल भूमि 11.029 हेक्टेयर, डीआरआई संयंत्र – 2.145 लाख टन प्रतिवर्ष, स्टील मेल्टिंग शॉप – 2.24 लाख टन प्रतिवर्ष, रोलिंग मिल- 2 लाख टन प्रतिवर्ष, फेरो अलॉय क्षमता – 42,900 टन प्रतिवर्ष, सिंटर प्लांट – 200 टन प्रतिदिन, मेटल रिकवरी यूनिट – 10 टन प्रति घंटा, रीहीटिंग फर्नेस – 15 टन प्रति घंटा, कैप्टिव पावर प्लांट – 50 मेगावाट होगा।
जनसुनवाई में उठ सकते हैं ये प्रमुख सवाल
संयंत्र की प्रतिदिन जल आवश्यकता कितनी होगी? भूजल स्तर पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? फ्लाई ऐश, स्लैग और अन्य अपशिष्ट का निपटान कैसे होगा? प्रदूषण नियंत्रण के लिए कौन-कौन से उपकरण लगाए जाएंगे? कृषि भूमि और फसलों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? स्थानीय युवाओं को रोजगार में कितनी प्राथमिकता मिलेगी? पर्यावरणीय मानकों के पालन की निगरानी कौन करेगा?



