*43 हजार से अधिक कंटूर ट्रेंच के माध्यम से किया जाएगा वर्षा जल का संरक्षण*
उत्तर बस्तर कांकेर, 11 मार्च 2026/ जिले के गिरते भू-जल स्तर को रोकने और भविष्य के लिए पानी सहेजने की दिशा में ’मोर गांव मोर पानी’ महाभियान एक नई क्रांति लिख रहा है। कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान ने विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में जल संचयन की तस्वीर बदल दी है। इस महाअभियान में जल संरक्षण हेतु कुल 3 हजार 443 स्ट्रक्चर जिनमें मुख्यतः ट्रेंच, लूज बोल्डर, गैबियन, चेकडैम, सोक पिट, चेकडैम के साथ डबरी निर्माण के कार्य किए जा रहे हैं, जिसमें आगामी वर्षा ऋतु उपरांत बारिश के जल को संरक्षित किया जा सकें । इस महाभियान में कंटूर ट्रेंच निर्माण को केन्द्रित किया गया है, जो वर्षा जल को रोकने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी ने बताया कि जिले में अब तक 58 कंटूर ट्रेंच के कार्य कराए गए हैं। इनके माध्यम से कुल 43 हजिर 500 ट्रेंच खोदी गई हैं। मुख्य रूप से कोकानपुर, आलबेड़ा, कापसी, धनेलीकन्हार जैसी ग्राम पंचायतों में यह कार्य प्रमुखता से हुए हैं। उन्होंने बताया कि इसकी कार्ययोजना बनाने में आधुनिक जीआईएस (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसकी मदद से रिज टू वैली (पहाड़ी से घाटी तक) सिद्धांत पर आधारित स्ट्रक्चर्स की प्लानिंग की गई है, ताकि बारिश का पानी व्यवस्थित तरीके से संरचनाओं में एकत्र हो और अधिकतम जल संचयन हो सके।
*क्या है कंटूर ट्रेंच*
कंटूर ट्रेंच दरअसल पहाड़ी ढलानों पर समान ऊंचाई वाली रेखाओं पर खोदी गई खाइयां होती हैं। जिले की विषम भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इसे प्राथमिकता दी है। पहाड़ों के ढलान से नीचे आने वाले वर्षा जल को ये ट्रेंच बीच में ही रोक लेते हैं। पानी रुकने से वह मिट्टी के अंदर रिसता है, जिससे नीचे स्थित गांवों के कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर बढ़ जाता है। यह तकनीक उपजाऊ मिट्टी को भी बहने से रोकती है, जिससे मिट्टी कटाव कम होता है व क्षेत्रों में हरियाली बढती है ।
*मनरेगा से ग्रामीणों को मिला बड़ा आर्थिक सहारा*
जल संरक्षण के ये कार्य न केवल पर्यावरण बचा रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी साबित हो रहे हैं। इन कार्यों के माध्यम से अब तक जिले में 5 हजार 668 मानव दिवस का रोजगार सृजित किया जा चुका है। ग्रामीणों को लगभग 14 लाख 86 हजार रुपए की मजदूरी का भुगतान सीधे उनके खातों में किया गया है।
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