Pipeline Bursts: Fly Ash Becomes Airborne Toxin in Kunjemura!
निरीक्षण में खुली पोल: जिंदल पावर पर लाखों का जुर्माना, फिर भी जारी प्रदूषण का खेल
रायगढ़। जिले के तमनार क्षेत्र में स्थित जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) के फ्लाई एश डाइक से फैल रहे प्रदूषण ने एक बार फिर प्रशासन और कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुंजेमुरा गांव के ग्रामीणों की शिकायत के बाद जब पर्यावरण विभाग की टीम ने स्थल निरीक्षण किया, तो स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई।
ग्रामीणों की माने तो हल्की सी हवा चलते ही एश डाइक से उड़कर राखड़ पूरे गांव में फैल जाती है, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। खेत, घर, सड़क और यहां तक कि जल स्रोत भी इस जहरीली धूल की चपेट में हैं।
निरीक्षण में क्या मिला?
बताया जा रहा है कि पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने जब मौके का जायजा लिया, तो एश डाइक का संचालन पूरी तरह असंतोषजनक पाया गया। राखड़ सूखी होने के कारण यह तेजी से हवा में फैल रही थी। इसके बाद कंपनी को सुधार के निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया गया।
मंगलवार को दोबारा निरीक्षण में भी हालात में विशेष सुधार नहीं दिखा। इसके चलते विभाग ने कंपनी को नियंत्रण हेतु सख्त निर्देश दिए हैं।
साथ ही प्रदूषण फैलाने के लिए 4.20 लाख रुपए का नया जुर्माना लगाया गया है। दोनों मामलों को मिलाकर अब तक कुल 9.30 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति जमा करने का आदेश दिया गया है।
झिंकाबहाल हादसा: पाइप फटने से खेत और नाला बना राख का तालाब
इससे पहले झिंकाबहाल में भी JPL की लापरवाही सामने आई थी। जानकारी के अनुसार, फ्लाई एश स्लरी पाइपलाइन में लीकेज के कारण 18 फरवरी को पाइप अचानक फट गया। प्रेशर के साथ गीला फ्लाई एश आसपास के खेतों में भर गया और पास के नाले तक पहुंच गया।
यह नाला आगे चलकर केलो नदी में मिलता है, जिससे बड़े जल प्रदूषण का खतरा पैदा हो गया। पर्यावरण विभाग के निरीक्षण में भारी मात्रा में फ्लाई एश फैलाव पाया गया, जिसके बाद 5.10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।
90 लाख टन फ्लाई एश: प्रबंधन में नाकामी या लापरवाही?
मिली जानकारी अनुसार तमनार स्थित 3400 मेगावाट के इस विशाल पावर प्लांट से हर साल करीब 90 लाख मीट्रिक टन फ्लाई एश निकलता है। नियमानुसार इसका 100% सुरक्षित निपटान अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
खेत, सड़क, नदी सब प्रभावित — जिम्मेदार कौन?
रायगढ़ जिले में फ्लाई एश प्रदूषण अब एक गंभीर संकट बन चुका है। सड़कें, खेत, नदी-नाले—हर जगह राख की परत देखी जा सकती है। उद्योगों पर जुर्माने की कार्रवाई तो होती है, लेकिन इसका स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। क्या लाखों के जुर्माने से थमेगा प्रदूषण, या फिर ग्रामीणों को यूं ही जहरीली हवा में जीने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा?



