*प्रमोद अवस्थी मस्तूरी*
मस्तूरी। नारायण राठौर परिवार मस्तूरी द्वारा चार धाम की यात्रा पूर्ण करने के बाद अपने पुत्र के विवाह उपरांत श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन निवास में किया गया। वृंदावन धाम के कथा वाचक पंडित प्रदीप शुक्ला ने द्रौपदी के चीर हरण की मार्मिक कथा सुनाते हुए बताए कि हस्तिनापुर का राजा दुर्योधन था। जो पांडवों का चचेरा भाई था। दुर्योधन कौरवों में सबसे बड़ा था। कौरव पांडवों से जलते थे। पांडवों में सबसे बड़े युधिष्ठर थे। जो इस समय इंद्रप्रस्थ नगर में राज्य कर रहे थे। कौरवों का मामा शकुनि बहुत चालाक था। उसने दुर्योधन को सलाह दिया की। कौरवों को जुएं के खेल के लिए बुलाये। इस खेल में पांडवों का सारा राज्य अपने कब्जे में कर ले। दुर्योधन द्वारा बुलाये जाने पर पांडव तैयार हो गए। और खेल को खेलने के लिए आ गए। एक सभा का आयोजन हुआ जिसमें धृतराष्ट्र, भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और महात्मा विदुर जैसे महान लोग भी सम्मिलित हुए
इसके पश्चात चालाक शकुनि ने अपने छल के द्वारा पांडवों को हराना आरम्भ किया। सर्वप्रथम पांडव अपना राज्य को हार गए। इसके बाद युधिष्ठिर ने अपने आप और अपने चारों भाइयों को दांव पर लगा दिया और हार गए। अब पांडवों के पास दाव पर लगाने के लिए कुछ नहीं बचा तो द्रौपदी को इस खेल में दांव पर लगा कर पुनः फिर हार गए। दुर्योधन ने द्रौपदी को भी जीत लिया।
इस खेल में द्रौपदी को जीतने के बाद दुर्योधन ने भाई दुशासन को आदेश दिया। कि द्रौपदी को सभा में लेकर आओ। द्रौपदी पतिव्रता स्त्री थी। इसलिए उन्होंने आने से मना कर दिया। इसके पश्चात दुशासन ने द्रौपदी के बाल पकडे और सभा में घसीट कर ले आया।
दुर्योधन ने दुशासन को दुर्योधन को निर्वस्त्र करने का आदेश दिया। यह सुनकर द्रौपदी ने श्रीकृष्ण को पुकारा। श्री कृष्ण ने यह पुकार सुनी तो। श्री कृष्ण ने द्रौपदी के वस्त्र को बढ़ाना शुरू कर दिया। जैसे जैसे दुशासन द्रौपदी के वस्त्र निकाल रहा था। वैसे वैसे द्रौपदी का वस्त्र बढ़ता जा रहा था। अंत में दुशासन थक के हार गया पर द्रौपदी का चीर हरण नहीं कर पाया।
यह कथा सुनते हुए उपस्थित भक्त गण भावुक दिखे।
*मोनू राठौर एवं उनकी अर्धांगिनी ने पेश किया मिशाल*
मस्तूरी निवासी मोनू राठौर एवं उनकी अर्धांगिनी ने विवाह उपरांत श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ कथा में मुख्य यजमान बनकर आज के समय में मिसाल पेश किए क्योंकि आज के समय में नए दूल्हा एवं दुल्हन विवाह के पश्चात प्रायः नया जोडा कोई गोवा मसूरी या अन्य कहीं घूमने जाते हैं लेकिन इन दोनों ने निश्चय किया कि हम लोग कहीं भी घूमने नहीं जाएंगे हम दोनों श्रीमद् भागवत कथा में यजमान बनकर सुनेंगे इन दोनों के फैसले से परिवार के साथ ग्राम के लोगों ने दोनों को आशीर्वाद देते हुए सराहना किए।



