गंगरेल बांध छत्तीसगढ़ की शान और धमतरी जिले की पहचान है। यह केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश के कृषि, मत्स्य पालन, पेयजल, पर्यटन और ग्रामीण विकास की जीवनरेखा है।
मेरा संकल्प है कि गंगरेल बांध क्षेत्र को एक आधुनिक पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाए, जिससे स्थानीय युवाओं, महिलाओं और किसानों को नए अवसर मिलें। इस योजना के माध्यम से लगभग 500 से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
पर्यटन हब विकसित होने से:
– स्थानीय युवाओं को होटल, रिसॉर्ट, बोटिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स, गाइड, परिवहन एवं अन्य पर्यटन सेवाओं में रोजगार मिलेगा।
– किसानों को अपने कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मिलेगा।
– महिला स्व-सहायता समूहों को स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प एवं खाद्य सामग्री बेचने का अवसर मिलेगा।
– मत्स्य पालन, जैविक खेती एवं ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।
– गंगरेल क्षेत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाएगा।
गंगरेल बांध का संक्षिप्त इतिहास
– गंगरेल बांध (रविशंकर सागर परियोजना) का निर्माण 1970 के दशक में प्रारंभ हुआ।
– परियोजना का निर्माण कार्य लगभग 1978 में पूर्ण हुआ।
– यह महानदी पर निर्मित छत्तीसगढ़ की प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में से एक है।
– इस परियोजना के निर्माण से लगभग 52 गांव पूर्ण रूप से प्रभावित हुए, जबकि अनेक अन्य छोटे गांव एवं बस्तियां भी आंशिक रूप से प्रभावित हुईं।
– आज यह बांध लाखों किसानों की सिंचाई, पेयजल, मत्स्य पालन और पर्यटन का प्रमुख केंद्र है।
अब समय आ गया है कि गंगरेल बांध को केवल जलाशय नहीं, बल्कि रोजगार, पर्यटन, कृषि और युवा विकास का मॉडल बनाया जाए।
“गंगरेल का विकास — युवाओं का विश्वास, किसानों की समृद्धि और छत्तीसगढ़ की नई पहचान



