नई दिल्ली / एजुकेशन डेस्क:
देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और हाईटेक बनाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। UGC ने देश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को आदेश जारी किया है कि वे जुलाई 2026 सेमेस्टर से भारत सरकार के ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म SWAYAM (स्वयं) के कोर्सेज को अपने नियमित पाठ्यक्रम (Syllabus) का हिस्सा बनाएं।
इस नए नियम के तहत अब कॉलेजों को अपने सिलेबस से मेल खाते ऑनलाइन कोर्सेज की पहचान करनी होगी, छात्रों का रजिस्ट्रेशन कराना होगा और सबसे महत्वपूर्ण—’क्रेडिट ट्रांसफर’ (Credit Transfer) की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्या है यह पूरी योजना और इससे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई व डिग्री पर क्या असर होने वाला है।
आखिर क्या है SWAYAM और MOOCs?
अगर आप इस तकनीकी नाम से भ्रमित हैं, तो इसे आसान शब्दों में इस तरह समझा जा सकता है:
SWAYAM क्या है? यह केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित एक नेशनल ऑनलाइन एजुकेशन पोर्टल है। इस प्लेटफॉर्म पर IIT, IIM, UGC, IGNOU और NPTEL जैसी देश की शीर्ष संस्थाओं के बेहतरीन प्रोफेसरों द्वारा तैयार किए गए हजारों कोर्सेज उपलब्ध हैं।
MOOCs का क्या मतलब है? इसका पूरा नाम ‘मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज’ है। ये ऐसे डिजिटल कोर्सेज होते हैं, जिनमें देश-दुनिया का कोई भी छात्र घर बैठे इंटरनेट के जरिए दाखिला ले सकता है। यहाँ वीडियो लेक्चर, स्टडी मटेरियल, क्विज़ और असाइनमेंट जैसी सभी सुविधाएं मुफ्त या बेहद मामूली शुल्क (प्रमाणपत्र के लिए) पर मिलती हैं।
UGC के नए आदेश में क्या है खास?
UGC की इस नई गाइडलाइन के बाद कॉलेजों की पारंपरिक पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि:
1. डिग्री में जुड़ेंगे ऑनलाइन पढ़ाई के अंक: अब छात्र SWAYAM पोर्टल से जो भी कोर्स पास करेंगे, उसके क्रेडिट (अंक) उनकी मुख्य कॉलेज डिग्री की मार्कशीट में जोड़े जाएंगे।
2. होम कैंपस में परीक्षा की सुविधा: छात्रों को ऑनलाइन कोर्स के एग्जाम के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। जिन कॉलेजों को अनुमति मिलेगी, वे अपने ही परिसर (Own Campus) में इन कोर्सेज की अंतिम परीक्षा आयोजित करा सकेंगे।
कॉलेज छात्रों को क्या-क्या मिलेंगे फायदे?
इस नई व्यवस्था से छात्र-छात्राओं को कई बड़े लाभ मिलने वाले हैं:
टॉप संस्थानों से पढ़ने का मौका: देश के किसी भी छोटे शहर या गांव का छात्र अब IIT या IIM के प्रोफेसरों से सीधे ऑनलाइन सीख सकेगा।
पढ़ाई में लचीलापन (Flexibility): छात्र अपने मुख्य विषय के अलावा अपनी पसंद के अन्य इंटरडिसिप्लिनरी (मल्टी-डिसीप्लिनरी) विषयों की पढ़ाई भी कर सकेंगे।
करियर और प्लेसमेंट में मिलेगी बढ़त: आजकल जॉब मार्केट में केवल किताबी डिग्री काफी नहीं है। छात्र कॉलेज के साथ-साथ डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कोडिंग, मैनेजमेंट और कम्युनिकेशन जैसे आधुनिक कोर्सेज करके अपनी प्रोफाइल को मजबूत कर सकते हैं, जिससे नौकरी मिलने की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी।



