अदानी पावर के 1600 मेगावाट विस्तार पर उठे गंभीर सवाल, “पहले पुराने वादों का हिसाब, फिर नए विस्तार पर फैसला”

अदानी पावर लिमिटेड की प्रस्तावित 1600 मेगावाट (2म800 मेगावाट) ताप विद्युत विस्तार परियोजना को लेकर जनसुनवाई से पहले विरोध तेज होता जा रहा है। 13 जुलाई 2026 को ग्राम सुपा में प्रस्तावित जनसुनवाई से पूर्व जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी जीवन पटेल के नेतृत्व में क्षेत्र के कई ग्राम पंचायतों के सरपंचों और जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर रायगढ़ को ज्ञापन सौंपकर जनसुनवाई प्रक्रिया निरस्त करने तथा परियोजना विस्तार पर रोक लगाने की मांग की है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कंपनी पिछले लगभग 15 वर्षों से क्षेत्र में संचालित है, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व (ष्टस्क्र) और बुनियादी विकास जैसे मामलों में अपेक्षित लाभ नहीं मिला। ऐसे में पुराने मुद्दों का समाधान किए बिना नए विस्तार की अनुमति देना ग्रामीणों के हितों के साथ न्याय नहीं होगा।
रोजगार के नाम पर स्थानीय युवाओं की उपेक्षा का आरोप
ज्ञापन में कहा गया है कि कंपनी ने वर्षों से क्षेत्र के योग्य एवं शिक्षित युवाओं को नियमित और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध नहीं कराया। अधिकांश स्थानीय लोगों को केवल मजदूर स्तर तक सीमित रखा गया, जबकि स्थायी एवं तकनीकी पदों पर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी गई। इससे स्थानीय युवाओं में निराशा और असंतोष लगातार बढ़ा है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर चिंता
ज्ञापन में कंपनी पर पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि संयंत्र से निकलने वाली गैसों और फ्लाई ऐश का समुचित प्रबंधन नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उड़ती राख, कोयला धूल और बढ़ते प्रदूषण के कारण वायु गुणवत्ता प्रभावित हुई है तथा सांस, आंख और त्वचा संबंधी समस्याओं में वृद्धि की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।साथ ही कोयला परिवहन के दौरान सडक़ों पर उड़ती धूल और दुर्घटनाओं की आशंका को भी गंभीर मुद्दा बताया गया है।
CSR और विकास कार्यों पर भी सवाल
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कंपनी ने प्रभावित गांवों में अपेक्षित सामाजिक उत्तरदायित्व (ष्टस्क्र) के तहत विकास कार्य नहीं किए। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों में किए गए कई वादे आज तक अधूरे हैं तथा प्रभावित गांवों के विकास के लिए जनप्रतिनिधियों के साथ सार्थक संवाद भी नहीं हुआ।
किसानों और प्रभावित परिवारों की समस्याएं भी उठाईं
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि औद्योगिक विस्तार के कारण कई किसानों की कृषि भूमि प्रभावित हुई है। कुछ क्षेत्रों में जलभराव और औद्योगिक गतिविधियों के कारण खेती प्रभावित होने की शिकायतें हैं, जबकि प्रभावित लोगों को पर्याप्त मुआवजा और आवश्यक नागरिक सुविधाएं नहीं मिल सकीं।
पहले पुराने संयंत्र की समीक्षा, फिर नए विस्तार पर निर्णय
ज्ञापन ऐसे समय सामने आया है, जब अदानी पावर अपने विस्तार के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया में है। परियोजना दस्तावेजों के अनुसार विस्तार के बाद संयंत्र की कुल क्षमता 3800 मेगावाट हो जाएगी। वहीं प्रतिवर्ष लगभग 16.52 मिलियन टन कोयले की खपत, 82 एमसीएम पानी की आवश्यकता और 6.298 मिलियन टन फ्लाई ऐश एवं बॉटम ऐश उत्पन्न होने का अनुमान भी दर्ज है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वर्तमान संयंत्र के पर्यावरणीय दावों, फ्लाई ऐश प्रबंधन, वायु गुणवत्ता और जल स्रोतों पर पड़े प्रभावों की स्वतंत्र समीक्षा नहीं हुई, तो नए विस्तार की अनुमति देना उचित नहीं होगा।
जनसुनवाई में उठेंगे कई अहम सवाल
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस बार जनसुनवाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि जब देश में बिजली उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है और ऊर्जा संकट पहले जैसा नहीं रहा, तब रायगढ़ में ही एक और बड़े कोयला आधारित विस्तार की आवश्यकता क्यों है।साथ ही वे यह भी पूछ रहे हैं कि यदि कंपनी 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश उपयोग का दावा करती है, तो जिले के विभिन्न हिस्सों में खुले में दिखाई देने वाली राख और प्रदूषण की स्थिति की जिम्मेदारी कौन लेगा।
कई जनप्रतिनिधियों ने किया समर्थन
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन पर जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी जीवन पटेल के साथ क्षेत्र के कई ग्राम पंचायतों के सरपंचों और जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं। ज्ञापन की प्रतिलिपि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, क्षेत्रीय अधिकारी तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई है।



