उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन साई-वज्र’ के तहत बिजनौर की नूरपुर पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह वाहनों के लिए अनिवार्य हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) की ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर देश के अलग-अलग राज्यों में लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में सात शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और नकदी बरामद हुई है।
ChatGPT से तैयार किया ‘डिजिटल जाल’
पुलिस पूछताछ में जो खुलासा हुआ है, उसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। गिरोह के मुख्य संचालकों—तुषार शर्मा और अरशद—ने GoDaddy के माध्यम से डोमेन और होस्टिंग खरीदी थी। इसके बाद उन्होंने अत्याधुनिक AI टूल्स (जैसे ChatGPT) की मदद लेकर हूबहू परिवहन विभाग के आधिकारिक पोर्टल जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइटें तैयार कीं।
गिरोह ने आम जनता को भ्रमित करने के लिए bookkhsrplate.com और bookmyhsrp.com जैसे मिलते-जुलते डोमेन नेम का इस्तेमाल किया, ताकि लोग इसे असली सरकारी साइट समझकर आसानी से झांसे में आ जाएं।
15 राज्यों के लोग बने शिकार, ऐसे होता था खेल
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दिल्ली, पंजाब, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत देश के 15 राज्यों से कुल 29 शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। जब इन शिकायतों की कड़ियों को जोड़ा गया, तो इस रैकेट का भंडाफोड़ हुआ।
जांच के मुताबिक, फर्जी वेबसाइट पर बुकिंग के नाम पर जो भी ऑनलाइन पेमेंट आता था, उसे मोहित कुमार, अनस, प्रशांत कुमार और मोहम्मद फैजान के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। बाद में यह रकम आपस में बांट ली जाती थी और खाता उपलब्ध कराने वालों को उनका कमीशन दे दिया जाता था।
इन धाराओं में केस दर्ज, पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
मामले की गंभीरता को देखते हुए नूरपुर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं 318(4), 338, 336(3), 340(2) और आईटी एक्ट की धारा 66(D) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अनस, तुषार शर्मा, प्रशांत कुमार, मोहम्मद फैजान, मोहित कुमार, अरशद और रेहान के रूप में हुई है। इनके पास से पुलिस ने 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और ₹12,300 की नकदी जब्त की है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मुख्य आरोपी तुषार शर्मा का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और उस पर पहले से ही मारपीट, अपहरण और पॉक्सो (POCSO) एक्ट जैसे संगीन मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य बैंक खातों और मददगारों की तलाश में जुटी है।



