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जामगांव-नरहरपुर सड़क जर्जरः करोड़ों की लागत से बनी सड़क की डेढ़ साल में उखड़ने लगी परतें, ग्रामीण परेशान

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नरहरपुर। विकास की गूंज और बेहतर सड़क व्यवस्था के दावों के बीच जामगांव से नरहरपुर ब्लॉक मुख्यालय को जोड़ने वाली प्रमुख सड़क की बदहाल स्थिति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित जामगांव-नरहरपुर मार्ग की परतें महज डेढ़ साल के भीतर उखड़ने लगी हैं। सड़क के कई हिस्सों में गहरे गड्डे, टूटी-फूटी सतह, उखड़ी डामर की परतें और कीचड़ से भरे हिस्से ग्रामीणों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र के कई गांवों को नरहरपुर ब्लॉक मुख्यालय से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, विद्यार्थी, किसान, मजदूर और अन्य लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। सड़क की जर्जर हालत के कारण लोगों का सफर कठिन और जोखिमभरा हो गया है। बारिश के दौरान गड्डों में पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती, जिससे वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की खराब स्थिति के कारण बीमार और जरूरतमंद लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है। वहीं किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। बरसात के मौसम में सड़क पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति बनने से आवागमन और अधिक प्रभावित हो जाता है।

बताया जा रहा है कि कुछ वर्ष पहले इस मार्ग पर मरम्मत एवं रिपेयरिंग कार्य भी शुरू किया गया था, लेकिन इसके बावजूद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण और मरम्मत कार्य में गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। सड़क के इतनी कम समय में उखड़ने और जर्जर होने से निर्माण सामग्री की गुणवत्ता तथा कार्य की निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं।

ग्रामीणों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने संबंधित लोक निर्माण विभाग से सड़क का तत्काल निरीक्षण कराकर गड्डों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त हिस्सों का पुनर्निर्माण तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि से बनी सड़क का इतनी जल्दी खराब हो जाना गंभीर चिंता का विषय है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि लोक निर्माण विभाग द्वारा जल्द ही सड़क की मरम्मत और आवश्यक सुधार कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाल स्थिति को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह मार्ग क्षेत्र के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और सुरक्षित आवागमन से सीधे जुड़ा हुआ है।

अब बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क के डेढ़ साल के भीतर जर्जर होने के मामले में संबंधित विभाग कब संज्ञान लेगा और सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों या ठेकेदार के विरुद्ध कोई कार्रवाई की जाएगी या नहीं।

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