10 अगस्त तक तक चरणबद्ध प्रशिक्षण में 550 नवनिर्वाचित सरपंच ले रहे भाग
जीपीडीपी, जीआईएस, पीएम गतिशक्ति और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के आधुनिक तरीकों से कराया जा रहा परिचय
जल सुरक्षा से ग्रामीण आजीविका तक, विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप तैयार होंगे विकास के रोडमैप
रायगढ़, ग्रामीण विकास को नई दिशा देने और वीबी-जीराम जी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला पंचायत रायगढ़ द्वारा नवनिर्वाचित सरपंचों के लिए विशेष क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 3 से 10 अगस्त तक चलने वाले इस चरणबद्ध प्रशिक्षण में जिले की विभिन्न जनपद पंचायतों के लगभग 550 नवनिर्वाचित सरपंच भाग ले रहे हैं। सचिव प्रशिक्षण संस्थान, टी.वी. टॉवर रोड, रायगढ़ में प्रतिदिन प्रातः 11 बजे आयोजित हो रहे इस प्रशिक्षण का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं परिणामोन्मुख ग्राम विकास की अवधारणा से जोड़ना है, ताकि वे अपने ग्रामों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी विकास योजनाएं तैयार कर सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विकसित भारत वीबी-जीराम जी योजना के उद्देश्य, प्रावधान, अनुमेय कार्यों तथा ग्राम पंचायतों में रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री नीला राम पटेल के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण सत्रों का संचालन सहायक परियोजना अधिकारी श्री ऋषि गणेशन नायक, तकनीकी समन्वयक श्री आशुतोष श्रीवास्तव तथा जिला प्रोग्रामर श्री अभिषेक दांडेकर द्वारा किया जा रहा है। विशेषज्ञों द्वारा सरपंचों को व्यवहारिक उदाहरणों एवं तकनीकी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से योजना के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जा रहा है।
प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत विकास योजना के वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित निर्माण, जीआईएस आधारित योजना निर्माण, संसाधन मानचित्रण, पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा विभिन्न विभागों के अभिसरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही सरपंचों को यह भी बताया जा रहा है कि किस प्रकार उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर ग्राम पंचायतों में टिकाऊ एवं जनहितकारी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा सकता है। प्रशिक्षण में विकसित भारत जी-राम योजना के चार प्रमुख स्तंभ-जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, ग्रामीण आजीविका तथा आपदा न्यूनीकरण पर विशेष रूप से चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही योजना के छह प्रमुख फोकस क्षेत्रों-जल संरक्षण, सिंचाई, भू-जल पुनर्भरण, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, वाटरशेड विकास तथा वनीकरण के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं ग्राम पंचायतों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण की रणनीतियों से भी सरपंचों को अवगत कराया जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान 125 दिनों की रोजगार गारंटी, पंचायत सशक्तिकरण, विकास, विभागीय समन्वय तथा परिसंपत्तियों के परिपक्व विकास जैसे विषयों पर भी विस्तार से जानकारी दी जा रही है। विशेषज्ञों ने बताया कि योजना का उद्देश्य केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर, सहभागी एवं दीर्घकालिक विकास की दिशा में सक्षम बनाना भी है। कार्यक्रम में जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता में वृद्धि, ग्रामीण अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, महिला सहभागिता को बढ़ावा तथा सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे पंचायत प्रतिनिधियों की प्रशासनिक एवं तकनीकी क्षमता विकसित होगी और वे अपने ग्रामों की आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर, पारदर्शी एवं साक्ष्य-आधारित विकास योजनाएं तैयार कर प्रभावी ढंग से उनका क्रियान्वयन कर सकेंगे। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित सरपंचों से निर्धारित तिथि एवं समय पर प्रशिक्षण में अनिवार्य रूप से शामिल होने का आग्रह किया है। यह प्रशिक्षण विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप आत्मनिर्भर, समृद्ध, सशक्त एवं सतत विकासशील ग्राम पंचायतों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा तथा ग्रामीण विकास को नई गति प्रदान करेगा।



