मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
✍️= लोरमी विकासखंण्ड शिक्षा अधिकारी BEO श्रीमती मनीषा पाटले के आदेशों का बोडतरा कला के संकुल समन्वयक सनंत राजपूत ने किया अहेलना, बिना जाँच के खुद समन्वयक सनंत राजपूत ने दिये निर्णय,
✍️= संकुल समन्वयक सनंत राजपूत अपने सामाज के प्रधान पाठक दुर्गेश राजपूत को बचाने का किया पूरा प्लान तयार,
मुंगेली /लोरमी।- विकासखंड लोरमी के अंतर्गत ग्राम मुछेल स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में शाला प्रबंधन समिति (एसएमसी) के गठन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में पालक हरजीत कुमार भास्कर द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) लोरमी तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को लिखित शिकायत सौंपकर समिति के गठन को निरस्त करने और दोबारा निर्वाचन कराने की मांग की गई है। शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 3 अगस्त 2026 को शासकीय प्राथमिक शाला मुछेल में शाला प्रबंधन समिति का गठन किया गया, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में शासन द्वारा निर्धारित नियमों, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि समिति के गठन से पहले न तो पालकों को विधिवत सूचना दी गई और न ही ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव तथा अन्य संबंधित पक्षों को इसकी जानकारी दी गई।
शिकायत के अनुसार, विद्यालय के प्रधान पाठक दुर्गेश राजपूत द्वारा समिति गठन की प्रक्रिया को गोपनीय तरीके से संपन्न किया गया। आरोप है कि बैठक की सूचना सार्वजनिक नहीं की गई और अधिकांश पालकों को बैठक में शामिल होने का अवसर भी नहीं दिया गया। इससे समिति के गठन की निष्पक्षता और वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायतकर्ता हरजीत कुमार भास्कर ने बताया कि उन्होंने 31 जुलाई 2026 को स्वयं प्रधान पाठक से दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर बैठक की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया था। उस समय प्रधान पाठक ने सोमवार अथवा मंगलवार को बैठक आयोजित किए जाने की बात कही थी और यह आश्वासन दिया था कि सभी संबंधित पक्षों को इसकी सूचना दे दी जाएगी। इसके बावजूद बिना किसी पूर्व सूचना के बैठक आयोजित कर समिति का गठन कर दिया गया।
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि लोरमी विकासखंड शिक्षा अधिकारी मनीषा पाटले द्वारा जांच के संबंध में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि बोडतरा कला संकुल के संकुल समन्वयक सनंत राजपूत ने बिना किसी विस्तृत जांच और बिना सभी पक्षों के बयान लिए ही स्वयं निर्णय दे दिया। आरोप यह भी लगाया गया है कि संकुल समन्वयक ने अपने समाज से जुड़े प्रधान पाठक दुर्गेश राजपूत के पक्ष में वातावरण तैयार करने का प्रयास किया और निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया को प्रभावित किया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 21 और धारा 22 के अंतर्गत शाला प्रबंधन समिति का गठन लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी तरीके से किया जाना अनिवार्य है। इन प्रावधानों के अनुसार विद्यालय से जुड़े सभी पालकों को बैठक की सूचना देना तथा उन्हें अपनी बात रखने का अवसर प्रदान करना आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त समिति के गठन की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक करना भी जरूरी माना गया है।
शिकायतकर्ता ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा है कि किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया में संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। यदि किसी पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जाता है, तो ऐसी स्थिति में पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। शिकायतकर्ता ने इस पूरे प्रकरण को लिखित में कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) लोरमी व विकासखंड शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंप दी गई है। अधिकारियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिए हैं। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शाला प्रबंधन समिति विद्यालय के संचालन, विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, आधारभूत सुविधाओं के विकास तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में यदि समिति के गठन में पारदर्शिता नहीं बरती जाती है, तो इसका सीधा असर विद्यालय की व्यवस्था और बच्चों के भविष्य पर पड़ सकता है।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
वहीं, प्रशासन की ओर से निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया गया है।
यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक निष्पक्षता से जुड़ा हुआ विषय बन गया है। अंतिम निर्णय सक्षम अधिकारियों की जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। लेकिन आगामी दिनों में देखने वाली बात यह होगी कि खबर प्रसारण उपरांत उच्च अधिकारियों के द्वारा कुछ कार्रवाई किया जाता है या हर मामले की तरह यह मामला भी फाइलों में दब कर रह जाएगा यह तो आगामी दिनों में देखने वाली बात होगी,



