दिसंबर 2026 तक चलेगा अभियान, मध्यस्थता के जरिए राजीनामा योग्य प्रकरणों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण समाधान पर जोर
रायगढ़, विवादों के समाधान के लिए न्यायालयों पर निर्भरता कम करने और पक्षकारों के बीच आपसी सहमति एवं संवाद के माध्यम से मामलों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से माननीय उच्चतम न्यायालय, भारत द्वारा देशभर में ‘मीडिएशन फॉर द नेशन 3.0’ अभियान का शुभारंभ किया गया है। यह अभियान 1 अगस्त 2026 से शुरू हुआ है और आगामी दिसंबर 2026 तक संचालित किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का सौहार्दपूर्ण, त्वरित, सरल एवं कम खर्चीला समाधान उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही समाज में संवाद, आपसी समझ और सहमति के माध्यम से विवादों को समाप्त करने की संस्कृति को बढ़ावा देना भी अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।
राजीनामा योग्य लंबित प्रकरणों के समाधान पर विशेष जोर
‘मीडिएशन फॉर द नेशन 3.0’ अभियान के अंतर्गत न्यायालयों में लंबित ऐसे प्रकरण, जिनमें कानूनन समझौते की संभावना है, उन्हें संबंधित पक्षकारों की सहमति से मध्यस्थता के लिए भेजा जाएगा। मध्यस्थता की प्रक्रिया के माध्यम से दोनों पक्षों को अपने विवाद पर आपसी बातचीत और सहमति से समाधान तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। मध्यस्थता में प्रशिक्षित एवं निष्पक्ष मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने में सहायता करते हैं। इसका उद्देश्य किसी एक पक्ष के पक्ष में निर्णय देना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से ऐसा समाधान तलाशना है, जिसे वे स्वयं स्वीकार कर सकें।
स्वैच्छिक और गोपनीय प्रक्रिया, समय और धन दोनों की होगी बचत
मध्यस्थता एक स्वैच्छिक, गोपनीय एवं सरल प्रक्रिया है। इसमें पक्षकारों को अपने विवाद को आपसी बातचीत के माध्यम से सुलझाने का अवसर मिलता है। मध्यस्थ दोनों पक्षों की बात सुनकर उनके बीच संवाद को सुगम बनाते हैं और संभावित समाधान तक पहुंचने में सहायता करते हैं। इस प्रक्रिया से पक्षकारों के समय और धन की बचत होती है तथा लंबे समय तक चलने वाले विवादों का शीघ्र समाधान संभव होता है। आपसी सहमति से विवाद का समाधान होने से पक्षकारों के बीच संबंधों को बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
वैवाहिक विवाद से लेकर भूमि एवं व्यावसायिक मामलों तक होंगे शामिल
अभियान के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के ऐसे प्रकरणों को शामिल किया जाएगा, जिनमें आपसी समझौते की संभावना हो। इनमें वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावा प्रकरण, चेक बाउंस के मामले, समझौता योग्य आपराधिक प्रकरण, उपभोक्ता विवाद, कर्ज वसूली से संबंधित मामले, मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम के अंतर्गत आने वाले मामले, व्यावसायिक विवाद, सेवा संबंधी मामले, संपत्ति बंटवारा, बेदखली, भूमि अधिग्रहण, श्रम विवाद सहित अन्य दीवानी प्रकरण शामिल हैं। मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का समाधान होने पर पक्षकारों को लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया में समय और संसाधन खर्च करने से राहत मिल सकती है। अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र प्रकरणों को चिन्हांकित कर पक्षकारों की सहमति से मध्यस्थता के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। ‘मीडिएशन फॉर द नेशन 3.0’ अभियान न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुलभ, त्वरित और जनहितकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।



