वन विभाग ने 5 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाए 5 हजार पौधे, वैज्ञानिक तकनीक से तैयार हो रहा हरित क्षेत्र
रायपुर,
पथरीली और बंजर पहाड़ियों को हराभरा बनाने के लिए एक अभिनव पहल शुरू की है। रायगढ़ वन विभाग ने खरसिया वन परिक्षेत्र के बोतल्दा स्थित कक्ष क्रमांक 1147 में लगभग 5 हेक्टेयर क्षेत्र में 5 हजार पौधों का प्रायोगिक रोपण किया जा रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग कर इस क्षेत्र को हरित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह कार्य प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय के निर्देशन और मुख्य वन संरक्षक श्री मनोज कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
पथरीले क्षेत्र में अपनाई गई विशेष तकनीक
वन विभाग ने पहाड़ी क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पौधरोपण की विशेष व्यवस्था की है। ढलान वाले स्थानों पर वर्षाजल के बहाव को रोकने, मिट्टी के कटाव को कम करने और नमी बनाए रखने के लिए कंटूर रेखाओं के अनुसार पत्थरों की मेड़ें बनाई गई हैं। जहां चट्टानों के कारण मिट्टी बहुत कम थी, वहां टिन का घेरा बनाकर उसमें उपयुक्त मिट्टी भरकर पौधे लगाए गए हैं। चट्टानों की दरारों और प्राकृतिक गड्ढों का भी पौधरोपण के लिए उपयोग किया जा रहा है। इससे पौधों की जड़ों को पर्याप्त मिट्टी मिल रही है और उनके जीवित रहने की संभावना बढ़ रही है।
स्थल के अनुरूप लगाए गए पौधे
इस प्रायोगिक रोपण में पीपल, नीम, बरगद, कुसुम, हल्दू, करंज और कुल्लू जैसी स्थानीय और मिश्रित प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं। जैव विविधता और स्थानीय जलवायु को ध्यान में रखते हुए इन प्रजातियों का चयन किया गया है। पौधों को पशुओं से बचाने के लिए फेंसिंग की गई है तथा उन्हें सहारा देने के लिए बांस स्टेकिंग की व्यवस्था भी की गई है।
पौधों की नियमित देखभाल
वन विभाग पौधों के संरक्षण और बेहतर विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसके लिए निंदाई-गुड़ाई, आवश्यकता अनुसार सिंचाई, कीट एवं रोग नियंत्रण और नियमित निगरानी की व्यवस्था की गई है। वन अमला लगातार पौधों की देखभाल में जुटा हुआ है।
निरीक्षण के दौरान पीसीसीएफ ने किया पौधरोपण
रोपण कार्य की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर स्थल का निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत स्वयं पौधा लगाया और पौधों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों का अवलोकन किया।
पूरे प्रदेश के लिए बन सकता है मॉडल
वन विभाग का यह प्रयोग पथरीले और दुर्गम क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसी तकनीक को छत्तीसगढ़ के अन्य पथरीले वन क्षेत्रों में भी अपनाया जाएगा। इससे हरित आवरण बढ़ाने, मृदा एवं जल संरक्षण को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।



