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हरेली पर धोबनी में जीवंत हुई नागमत की प्राचीन परंपरा

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धोबनी ( सरसीवा ) – छत्तीसगढ़ के पारंपरिक और लोकपर्व हरेली के अवसर पर ग्राम धोबनी में वर्षों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा नागमत का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। ग्राम के राम-सीता चौक में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में ग्रामीणों ने भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हुए अपनी प्राचीन लोक परंपरा को जीवंत रखा।

हरेली पर्व छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और ग्रामीण जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन किसान कृषि औजारों की पूजा करने के साथ-साथ अपने आराध्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं। इसी धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण के बीच ग्राम धोबनी में हर वर्ष नागमत की परंपरा निभाई जाती है।

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गांव की मान्यता के अनुसार नागमत कार्यक्रम के दौरान नागमत वाले अलग-अलग स्वरूप धारण कर भगवान शिव की स्तुति और आराधना करते हैं। इस दौरान भाईसासुर, सिद्ध बाबा, शेषनाग सहित विभिन्न धार्मिक स्वरूपों में श्रद्धालु अपनी प्रस्तुति देते हैं। इन स्वरूपों के माध्यम से भगवान शिव के प्रति आस्था प्रकट की जाती है और ग्रामीण अपनी पुरानी मान्यताओं को श्रद्धा के साथ आगे बढ़ाते हैं।

नागमत के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन के बीच नागमत की प्रस्तुति होती है। श्रद्धालु अलग-अलग रूपों में भगवान की स्तुति करते हैं और अपनी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं। ग्रामीणों का विश्वास है कि नागमत के इस पवित्र अवसर पर भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा गांव में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।

आदिकाल से चली आ रही है परंपरा

ग्राम धोबनी में नागमत की यह परंपरा कोई नई परंपरा नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के अनुसार यह आदिकाल से चली आ रही है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस परंपरा को ग्रामीणों ने संभालकर रखा है। बुजुर्गों से मिली इस लोक परंपरा को आज की पीढ़ी भी उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभा रही है।

बदलते समय और आधुनिकता के दौर में जहां कई ग्रामीण परंपराएं धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही हैं, वहीं ग्राम धोबनी के ग्रामीणों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का प्रयास किया है। हर वर्ष हरेली के अवसर पर नागमत का आयोजन कर ग्रामीण न केवल भगवान शिव की आराधना करते हैं, बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी गांव की प्राचीन संस्कृति और परंपराओं से जोड़ रहे हैं।

राम-सीता चौक बना आस्था का केंद्र

हरेली के दिन राम-सीता चौक में नागमत कार्यक्रम को देखने के लिए ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। आसपास के लोग भी इस पारंपरिक कार्यक्रम में शामिल होते हैं और नागमत की प्रस्तुतियों को श्रद्धा के साथ देखते हैं। कार्यक्रम के दौरान पूरा वातावरण धार्मिक एवं सांस्कृतिक रंग में रंग जाता है।

नागमत में अलग-अलग रूपों में प्रस्तुति देने वाले लोगों के प्रति ग्रामीणों में विशेष श्रद्धा रहती है। भगवान शिव और माता पार्वती की स्तुति के साथ प्रस्तुत किए जाने वाले इन स्वरूपों को गांव की धार्मिक मान्यता और लोकविश्वास से जोड़कर देखा जाता है।

लोक संस्कृति को बचाने का प्रयास

ग्राम धोबनी में आयोजित नागमत कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और ग्रामीण परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस तरह के आयोजन ग्रामीण जीवन की पुरानी मान्यताओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि नागमत की परंपरा को आगे भी इसी तरह जारी रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति और पूर्वजों से चली आ रही परंपराओं को भूलें नहीं। हरेली के अवसर पर हर वर्ष होने वाला यह आयोजन गांव की पहचान और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

ग्राम धोबनी में इस वर्ष भी हरेली के शुभ अवसर पर नागमत कार्यक्रम ने ग्रामीण संस्कृति, आस्था और परंपरा की अनूठी तस्वीर प्रस्तुत की। राम-सीता चौक में भगवान शिव की स्तुति, विभिन्न धार्मिक स्वरूपों की प्रस्तुति और ग्रामीणों की श्रद्धा ने हरेली पर्व को और भी विशेष बना दिया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता के दौर में भी गांवों में अपनी सदियों पुरानी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का जज्बा कायम है।

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