मातृ एवं शिशु अस्पताल में 45 बच्चों व अभिभावकों को वितरित किए गए निःशुल्क उपकरण
उत्तर बस्तर कांकेर स्वास्थ्य विभाग द्वारा टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों के लिए आज एक दिवसीय पियर गु्रप चर्चा पर आधारित कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें इससे पीड़ित बच्चों और उनके माता-पिता ने हिस्सा लिया। उक्त कार्यशाला में विशेष अतिथि के रूप में दिल्ली से आईं श्रीमती ज्योत्सना रंगीन तथा रायपुर से श्री उज्जवल व्यास ने अपने अनुभव साझा किए और टाइप-वन डायबिटीज से पीड़ित बच्चों व उनके माता-पिता को उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया।
कार्यशाला के पश्चात् सभी उपस्थित 45 बच्चे जो टाइप-1 डायबिटीज से ग्रसित हैं, उन्हें खून में शर्करा स्तर की नियमित जांच करने के लिए ग्लूकोमीटर, ग्लूकोस्ट्रिप, लेनसेट तथा इंसुलिन पेन का निःशुल्क वितरण किया गया।
एनसीडी सेल से जिला सलाहकार डॉ. योगेश प्रजापति ने बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ आर.सी. ठाकुर के निर्देशानुसार उक्त कार्यशाला में विलियम क्लिंटन फाउण्डेशन के संयुक्त सहयोग से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल अलबेला पारा कांकेर में आज एकदिवसीय पियर ग्रुप चर्चा आधारित कार्यशाला आयोजित की गई।
क्या है डायबिटीज टाइप-1
कार्यशाला में जानकारी देते हुए बताया गया कि डायबिटीज टाइप-1 एक ऐसी ऑटोइम्यून बीमारी है जो, अग्न्याशय (पैंक्रियाज) की उन कोशिकाओं को नष्ट कर देती है, जो कि इंसुलिन बनाती है जिसकी वजह से रक्त में शुगर (शर्करा) का स्तर बढ़ जाता है। इसका मुख्य लक्षण बार-बार पेशाब आना, अधिक प्यास लगना, हर समय थकान महसूस होना, ज्यादा भूख लगना और वजन घटना है, जिसके उपचार व प्रबंधन हेतु मरीजों को इंसुलिन पंप के जरिए रोज इंसुलिन लेना पड़ता है।
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि नियमित स्वस्थ आहार और व्यायाम ब्लड शुगर की नियमित जाँच बेहद जरूरी है। अंत में कार्यशाला में उपस्थित 45 बच्चों व उनके अभिभावकों को ग्लूकोमीटर, ग्लूकोस्ट्रिप, लेनसेट व इंसुलिन पेन सेट का निःशुल्क वितरण किया गया। इस अवसर पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. विमल भगत, डॉ. हेमंत नाग (शिशु रोग विशेषज्ञ) ने भी मरीजों को आहार-विहार तथा आवश्यक सावधानियों व उपचार से संबंधित जानकारी दी।



