विद्यालय के बच्चों ने सिर पर भोजली की टोकरी रखकर निभाई परंपरा, ऐतिहासिक शिवमंदिर तालाब में हुआ विसर्जन
प्रमोद अवस्थी मस्तूरी
मस्तूरी। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा और लोकपर्वों को संजोने के उद्देश्य से मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ओखर में भोजली तिहार पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय द्वारा प्रत्येक तीज-त्योहार को पारंपरिक तरीके से मनाने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण भी शामिल हुए।
संस्था के प्राचार्य रामेश्वर प्रसाद गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन एवं ग्राम सरपंच लल्लू यादव के संरक्षण में आयोजित भोजली उत्सव ने पूरे गांव को लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
भोजली विसर्जन के लिए विद्यालय से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा में ग्रामीणजन बाजे-गाजे के साथ आगे-आगे चल रहे थे, वहीं पीछे स्कूली बच्चे सिर पर भोजली से सजी टोकरी रखकर कतारबद्ध होकर चल रहे थे। पारंपरिक लोकगीतों और उत्साहपूर्ण वातावरण के बीच निकली यह यात्रा ग्रामीणों और राहगीरों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।
भोजली हमारी लोकसंस्कृति और आपसी भाईचारे का पर्व है। इस भावना के साथ बच्चे और ग्रामीण ऐतिहासिक शिवमंदिर तालाब पहुंचे, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भोजली का विधिवत विसर्जन किया गया। इस दौरान पूरा वातावरण छत्तीसगढ़ी लोकपरंपरा और उत्सव की भावना से सराबोर रहा।
प्राचार्य रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने कहा कि विद्यालय का प्रयास विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ अपनी माटी, संस्कृति और लोकपरंपराओं से जोड़ना है। भोजली जैसे पर्व हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
सरपंच लल्लू यादव ने विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन गांव की एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के साथ बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव की भावना पैदा करते हैं।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं संजय दिव्य मोहन पाटले, राममूर्ति डारके, रणजीत सिंह महिलांगे, अनिल शर्मा, व्यायाम शिक्षक सुनील राव,मिडिल स्कूल प्रधानपाठिका नीलिमा सिंह, प्राथमिक विद्यालय के प्रधानपाठक ईश्वर राठौर,अजय साहू संगीता साहू,उमाशंकर कौशिक, चंद्रिका प्रसाद जांगड़े,रामनारायण मरकाम,श्यामरतन जगत,अनिल पटेल, धंजू साहू,बसंत कुमार राज,गंगा साहू,सुचिता लकड़ा,सुरेन्द्र जगत,राहुल साहू,विनोद, अश्विनी रजक सहित विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता रही। भोजली तिहार का यह आयोजन लोकसंस्कृति के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल बनकर सामने आया।



