रायगढ़, 41 वें चक्रधर समारोह की सांस्कृतिक श्रृंखला में 17 सितंबर की शाम कला और संस्कृति के विविध रंगों से सजेगी। मंच पर कथक, ओडिसी और भरतनाट्यम जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों के साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति की मनोहारी झलक देखने को मिलेगी। स्थानीय और प्रादेशिक कलाकारों के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत शाम 5 बजे स्थानीय एवं प्रादेशिक कलाकारों की प्रस्तुतियों से होगी। रिदम कल्चरल सेंटर, रायगढ़ के 10 कलाकार समूह नृत्य की प्रस्तुति देंगे। इसके बाद महासमुंद की लिली चौहान, बिलासपुर की दीक्षा जायसवाल और रायपुर की शिल्पा सिंह एकल कथक प्रस्तुत करेंगी। शाम 6 बजे से शिव शक्ति कला संस्थान, बिलासपुर के 8 कलाकार कथक की सामूहिक प्रस्तुति देंगे। इसके बाद मंच पर शास्त्रीय नृत्य की राष्ट्रीय स्तर की प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू होगा।
शाम 7 बजे भुवनेश्वर की जाह्नवी बेहरा ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद बेंगलुरु की शिवरंजनी हरीश एवं उनके 4 कलाकारों का दल भरतनाट्यम प्रस्तुत करेगा। रात 8.55 बजे कोलकाता की श्रीमती मधुमिता रॉय मिश्रा 4 कलाकारों के साथ कथक की प्रस्तुति देंगी। रात 9.45 बजे चेन्नई के कलार्पणा नृत्य समूह द्वारा भरतनाट्यम की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रहेगी।
बस्तर के ‘बादल’ दल की प्रस्तुति से होगा सांस्कृतिक संध्या का समापन
रात 10.45 बजे के बाद सांस्कृतिक संध्या का समापन बस्तर एकेडमी ऑफ डांस, आर्ट्स एंड लिटरेचर के ‘बादल’ दल की भव्य प्रस्तुति से होगा। करीब 40 कलाकारों का यह दल पारंपरिक गीत एवं लोक नृत्य प्रस्तुत करेगा। प्रस्तुति के माध्यम से बस्तर की लोक परंपरा, जनजातीय संस्कृति और वहां की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक मंच पर दिखाई देगी।



