बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – झीरम हमले के मामले में 13 साल बाद आए फैसले को लेकर घटना के प्रत्यक्षदर्शी एवं युवा आयोग के पूर्व सदस्य अजय सिंह ने असंतोष जताया है। उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच प्रक्रिया और मामले में सजा के आधार को लेकर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई है।
प्रेसवार्ता में अजय सिंह ने खुद को घटना का पीड़ित बताते हुए कहा कि जिन 10 आरोपियों को मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई है, उनकी गिरफ्तारी के बाद शिनाख्त के लिए घटना में जीवित बचे प्रत्यक्षदर्शियों को क्यों नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि यदि पीड़ित या प्रत्यक्षदर्शी आरोपियों को पहचानता तक नहीं है, तो मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और जांच प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा होनी चाहिए।
अजय सिंह ने दावा किया कि झीरम हमले का मास्टरमाइंड नक्सल कमांडर देवा था, जो बाद में तेलंगाना में आत्मसमर्पण कर चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि देवा को जांच के दायरे में क्यों नहीं लाया गया। उनके मुताबिक, देवा की गवाही मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को स्पष्ट कर सकती थी।
उन्होंने NIA की कार्रवाई और जांच के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले के तथ्यों, साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की। अजय सिंह ने आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली देवा की भूमिका की जांच और उसका नार्को टेस्ट कराने की भी मांग की, ताकि उनके अनुसार झीरम हमले से जुड़े तथ्यों को सामने लाया जा सके।
कांग्रेस का पक्ष
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कांग्रेस जिला अध्यक्ष बीजापुर लालू राठौर ने भी झीरम कांड से जुड़ी NIA की रिपोर्ट और कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
लालू राठौर ने कहा कि उन्हें भी लगता है कि झीरम कांड की जांच में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच अधूरी रह गई है। उन्होंने मामले से जुड़े सभी तथ्यों और साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा की मांग की। साथ ही आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली देवा की भूमिका की जांच और नार्को टेस्ट कराए जाने की आवश्यकता जताई।
या आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए गए इसकी पुष्टि हम नहीं करते।



