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लय, ताल और भाव की जुगलबंदी से नव्या-आद्या ने रचा कथक का रंग

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रायगढ़, 41वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर महोत्सव की 9वीं सांस्कृतिक संध्या में शास्त्रीय नृत्य की मनोहारी छटा देखने को मिली। मंच पर घुंघरुओं की झंकार, लय-ताल की सुंदर जुगलबंदी और भावों की सजीव अभिव्यक्ति ने वातावरण को कला और संस्कृति के रंग में रंग दिया। इसी क्रम में युवा कलाकार नव्या यादव और आद्या पाठक ने अपनी कथक प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया।

नृत्य गुरु जेनिफर जोसेफ से प्रशिक्षण प्राप्त नव्या यादव और आद्या पाठक ने अपनी प्रस्तुति में कथक की विविध शैलियों और भाव पक्ष को खूबसूरती से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की शुरुआत दुर्गा माता पर आधारित श्लोक से हुई। इसके बाद रायगढ़ घराने के पक्षी परन, आमद परन तथा मध्य और द्रुत लय पर आधारित तोड़ों की प्रस्तुति ने कथक की लयकारी और तकनीकी पक्ष को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।

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प्रस्तुति के अंतिम चरण में कहरवा ताल पर आधारित राधा-कृष्ण लीला के भाव पक्ष को तिहाई और कवित्त के साथ प्रस्तुत किया गया। इसके बाद ‘होली खेलत’ की मनमोहक प्रस्तुति ने मंच पर उल्लास और रंगों की छटा बिखेर दी। दोनों कलाकारों की भावाभिव्यक्ति, तालबद्धता और नृत्य कौशल ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया। प्रस्तुति में पढ़ंत पर गुरु जेनिफर जोसेफ, गायन में गुरु देव चौहान एवं आसरा चौहान, तबले पर गुरु देवेंद्र उपाध्याय तथा खंजरी पर आयुष सिंह ने संगत दी। शानदार तालमेल के साथ हुई इस प्रस्तुति पर दर्शकों ने जोरदार तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

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