Home Blog कथकली की भाव-भंगिमाओं से जीवंत हुआ हनुमान-भीम का प्रसंग

कथकली की भाव-भंगिमाओं से जीवंत हुआ हनुमान-भीम का प्रसंग

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गुरु कोट्टक्कल नंदकुमारन एवं दल ने ‘कल्याण सौगंधिकम’ से जीवंत की महाभारत की कथा

रायगढ़, 41वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर समारोह की 9वीं सांस्कृतिक संध्या में गुरु कोट्टक्कल नंदकुमारन एवं दल ने कथकली की मनोहारी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने महाभारत के प्रसंग ‘कल्याण सौगंधिकम के माध्यम से हनुमान और भीम के मिलन की कथा को प्रभावशाली अभिनय और भाव-भंगिमाओं के साथ मंच पर साकार किया।

प्रस्तुति में गुरु कोट्टक्कल नंदकुमारन ने हनुमान तथा सदानम मणिकंदन ने भीम की भूमिका निभाई। कथा में हनुमान जी बूढ़े वानर का रूप धारण कर भीम का मार्ग रोकते हैं। भीम अपनी पूरी शक्ति लगाने के बावजूद उनकी पूंछ को हटा नहीं पाते। अंततः हनुमान द्वारा स्वयं को अपना बड़ा भाई बताए जाने पर दोनों भाइयों का आत्मीय मिलन होता है। इस पूरे प्रसंग को कलाकारों ने कथकली की विशिष्ट मुद्राओं, अभिनय और भावाभिव्यक्ति से जीवंत कर दिया। गुरु कोट्टक्कल नंदकुमारन नायर कथकली के प्रतिष्ठित कलाकार हैं। देश-विदेश में अनेक प्रस्तुतियां दे चुके नंदकुमारन नायर को केरल संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, केरल कलामंडलम पुरस्कार और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वे कथकली के आट्टक्कथा लेखन और कोरियोग्राफी के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं।

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