बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला – वन्यजीव सप्ताह 2026 के उपलक्ष्य में इन्द्रावती टायगर रिजर्व का पहचान चिन्ह (Logo) तैयार करने हेतु आयोजित प्रतियोगिता की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है।
पहले यह प्रतियोगिता 02 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तावित थी, लेकिन ज्यादा से ज्यादा प्रतिभागियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अब अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। इस प्रतियोगिता में भारत के सभी नागरिक भाग ले सकते हैं।
लोगो की थीम और दिशा-निर्देश
वन विभाग के अनुसार, लोगो में क्षेत्र में पाए जाने वाले वन्यजीवों बाघ, वन भैंसा और ऊदबिलाव को प्रमुखता से दिखाना अनिवार्य है। लोगो में “इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर, छत्तीसगढ़” का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। राजमुद्रा या अशोक स्तंभ का उपयोग नहीं किया जाना है।
डिजाइन अत्यधिक जटिल नहीं होना चाहिए और हर आकार में स्पष्ट व आकर्षक दिखना चाहिए। यदि लोगो AI से बनाया गया है तो AI Generated का उल्लेख और उपयोग किए गए टूल का नाम देना अनिवार्य होगा। प्रतिभागियों को HD सॉफ्ट कॉपी के साथ प्रपोर्शन रेशियो वाली फाइल भी जमा करनी होगी।
पुरस्कार और आवेदन प्रक्रिया
उत्कृष्ट एवं चयनित लोगो डिजाइन को प्रबंधन द्वारा पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इच्छुक प्रतिभागी अपना डिजाइन नाम, पता, मोबाइल नंबर, ई-मेल, उम्र और व्यवसाय की जानकारी के साथ आधिकारिक ई-मेल dyditrbijapur@gmail.com पर भेज सकते हैं।
इंद्रावती टायगर रिजर्व का महत्व
इंद्रावती टायगर रिजर्व बीजापुर जिले में इंद्रावती नदी के नाम पर स्थित है। इसके अंतर्गत पामेड़ और भैरमगढ़ अभ्यारण्य आते हैं। यह महाराष्ट्र-तेलंगाना सीमावर्ती क्षेत्र है, जहां बाघ, तेंदुआ, वन भैंसा, गिद्ध, ऊदबिलाव, चीतल, सांभर, गौर, भालू सहित अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं। यह छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर और जैव-विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है।



