मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
खैराखुर्द में तीन पेयजल कार्यों सहित दो कांक्रीटीकरण कार्यों की जांच की मांग; कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत, सीईओ सुरेश कुमार कंवर ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
मुंगेली/लोरमी। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर स्वीकृत सरकारी राशि का वास्तविक उपयोग हो रहा है या नहीं, इस सवाल ने मुंगेली जिले के लोरमी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत भस्करा के आश्रित ग्राम खैराखुर्द में कथित निर्माण एवं वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चर्चा तेज कर दी है। यहां पेयजल सुविधा से जुड़े तीन कार्यों और कांक्रीटीकरण के दो कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीण रमेश टोंडे ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए लाखों रुपये की स्वीकृति दी गई, लेकिन संबंधित स्थलों पर काम नहीं कराया गया और राशि आहरण किए जाने की बात सामने आई है। शिकायत में ग्राम पंचायत को प्राप्त मूलभूत राशि तथा 14वें एवं 15वें वित्त आयोग की निधियों के उपयोग की भी जांच कराने की मांग की गई है।
मामले में जनपद पंचायत लोरमी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सुरेश कुमार कंवर ने आश्वासन दिया है कि जांच में शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे अब मामले में प्रशासनिक जांच और उसके निष्कर्षों को लेकर निगाहें टिकी हुई हैं।
कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत, टोकन क्रमांक 19573
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम खैराखुर्द निवासी रमेश टोंडे, पिता बुलखूराम टोंडे ने 13 अक्टूबर 2026 को जिला मुंगेली के कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत का टोकन क्रमांक 19573 बताया गया है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत भस्करा में स्वीकृत कुछ निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति और सरकारी अभिलेखों में दर्ज जानकारी के बीच अंतर हो सकता है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले की जांच केवल कार्यालयीन दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित स्थलों पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन भी कराया जाए।
शिकायतकर्ता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में निर्माण स्थलों की वास्तविक स्थिति, स्वीकृति आदेशों, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर और भुगतान अभिलेखों का मिलान जांच के लिए महत्वपूर्ण होगा।
तीन पेयजल कार्यों पर सवाल, स्वीकृत राशि के उपयोग की जांच की मांग
शिकायत में खैराखुर्द में पेयजल सुविधाओं के लिए स्वीकृत तीन कार्यों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आवेदन के अनुसार, गांव प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में शामिल है। शिकायतकर्ता ने इन कार्यों की स्वीकृत राशि और मौके पर हुए निर्माण की जांच कराने की मांग की है।
पहला मामला— रूपचंद के घर के पास हैंडपंप खनन: शिकायत के मुताबिक, इस कार्य के लिए एक लाख रुपये की स्वीकृति दी गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित स्थल पर हैंडपंप खनन का कार्य नहीं कराया गया। इसकी पुष्टि के लिए स्वीकृति आदेश, भुगतान विवरण और स्थल निरीक्षण जरूरी है।
दूसरा मामला— मंगलू के घर के पास बोर खनन, मोटर पंप एवं ओवरहेड टैंक: आवेदन में इस कार्य के लिए एक लाख 63 हजार रुपये की स्वीकृति का उल्लेख है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मौके पर संबंधित कार्य नहीं कराया गया। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कार्य की वास्तविक प्रगति क्या है और राशि का भुगतान किस आधार पर किया गया।
तीसरा मामला— मंगल भवन के पास मोटर पंप एवं ओवरहेड टैंक: शिकायत में इस कार्य के लिए भी एक लाख 63 हजार रुपये की स्वीकृति का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि संबंधित स्थल पर भी काम नहीं हुआ।
यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह जांच का विषय होगा कि स्वीकृत राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया और संबंधित कार्यों की पूर्णता के संबंध में विभागीय अभिलेखों में क्या दर्ज है।
सतनाम भवन परिसर और मेन रोड से भवन तक कांक्रीटीकरण पर भी सवाल
शिकायत में खैराखुर्द स्थित सतनाम भवन परिसर में कांक्रीटीकरण कार्य को लेकर भी अनियमितता की आशंका जताई गई है। आवेदन के अनुसार, इस कार्य के लिए चार लाख 12 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आवेदन प्रस्तुत किए जाने तक कार्य शुरू नहीं हुआ था, जबकि राशि आहरित किए जाने की बात कही गई है।
इसी तरह, मेन रोड से सतनाम भवन तक कांक्रीटीकरण कार्य के लिए भी चार लाख 12 हजार रुपये की स्वीकृति का उल्लेख शिकायत में किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस कार्य की राशि आहरित होने के बावजूद मौके पर निर्माण कार्य नहीं कराया गया।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन के लिए आवश्यक होगा कि दोनों कार्यों की तकनीकी स्वीकृति, स्वीकृत लंबाई, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, भुगतान विवरण और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।
यदि अभिलेखों में कार्य पूर्ण दर्शाया गया है, लेकिन स्थल पर निर्माण नहीं मिलता, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी गंभीरता से जांच करनी होगी। वहीं, यदि कार्य आंशिक रूप से हुआ है या भुगतान किसी अन्य प्रक्रिया के तहत किया गया है, तो उसकी भी अभिलेखों के आधार पर पुष्टि आवश्यक होगी।
मूलभूत राशि और वित्त आयोग की निधियों के उपयोग पर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने ग्राम पंचायत भस्करा को प्राप्त मूलभूत राशि तथा 14वें और 15वें वित्त आयोग से संबंधित निधियों के उपयोग की जांच की मांग भी की है। उनका आरोप है कि पंचायत को उपलब्ध कराई गई राशि के उपयोग में अनियमितता हुई है।
इस संबंध में पंचायत की कैशबुक, लेजर, बैंक स्टेटमेंट, पंचायत प्रस्ताव, बिल-वाउचर, भुगतान विवरण और कार्यवार व्यय अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि स्वीकृत राशि के मुकाबले वास्तविक निर्माण कितना हुआ और संबंधित कार्यों से ग्रामीणों को कितना लाभ मिला।
सवाल केवल सरकारी राशि की स्वीकृति का नहीं, बल्कि उस राशि से धरातल पर हुए वास्तविक विकास कार्यों का है।
सीईओ सुरेश कुमार कंवर का आश्वासन, जांच में सही पाए जाने पर होगी कार्रवाई
मामले को लेकर जनपद पंचायत लोरमी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरेश कुमार कंवर ने आश्वासन दिया है कि शिकायत की जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सीईओ के इस आश्वासन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत में उल्लेखित सभी निर्माण कार्यों की जांच किस प्रकार कराई जाती है और जांच में किन तथ्यों का खुलासा होता है।
शिकायतकर्ता की मांग है कि जांच दल संबंधित स्थलों का निरीक्षण करे और सरकारी दस्तावेजों में दर्ज कार्यों का वास्तविक स्थिति से मिलान करे। साथ ही, जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सरपंच अनूप के कथित बयान से भी उठा विवाद
निर्माण कार्यों को लेकर शिकायत के बीच ग्राम पंचायत के सरपंच अनूप के साथ पत्रकारों की कथित बातचीत भी चर्चा में है। बताया गया है कि पत्रकारों ने निर्माण कार्यों से जुड़े सवालों पर जानकारी लेने का प्रयास किया। इस दौरान सरपंच द्वारा कथित तौर पर कहा गया, “जिसको जो छापना है छाप लो, मैं अधिकारियों से बना लूंगा।”
हालांकि, इस कथित बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सरपंच का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम का संदर्भ स्पष्ट होना जरूरी है। संबंधित सरपंच का पक्ष सामने आने के बाद मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
धारा 40 के तहत कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता रमेश टोंडे ने ग्राम पंचायत भस्करा के सरपंच के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई करते हुए पद से हटाने की मांग की है।
हालांकि, केवल शिकायत के आधार पर किसी जनप्रतिनिधि को दोषी नहीं माना जा सकता। किसी भी प्रकार की कार्रवाई जांच में सामने आए तथ्यों, संबंधित कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही की जा सकती है।
यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो सक्षम प्राधिकारी संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
अब जांच के निष्कर्षों पर टिकी निगाहें
ग्राम पंचायत भस्करा के आश्रित ग्राम खैराखुर्द में पेयजल सुविधा से जुड़े तीन कार्यों और कांक्रीटीकरण के दो कार्यों को लेकर दर्ज शिकायत ने पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी और सरकारी राशि के उपयोग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन शिकायत में उल्लेखित सभी कार्यों का भौतिक सत्यापन कराता है या नहीं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। क्या स्वीकृत राशि के अनुरूप निर्माण कार्य हुए हैं? क्या भुगतान अभिलेख और मौके की स्थिति एक-दूसरे से मेल खाते हैं? और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाती है?
फिलहाल, जनपद पंचायत सीईओ लोरमी सुरेश कुमार कंवर के कानूनी कार्रवाई के आश्वासन के बाद मामले में निष्पक्ष जांच और उसके परिणाम का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



