नया पीवी ऐप बना विरोध की वजह, काले कपड़े पहनकर रैली निकाल जलाए शो-कॉज नोटिस
कांकेर – कांकेर जिले के सभी पटवारी फसल गिरदावरी और फसल भौतिक सत्यापन मोबाइल ऐप की तकनीकी खामियों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के कारण जिले में डिजिटल फसल सर्वेक्षण और जमीन से जुड़े सभी कामकाज पूरी तरह ठप पड़े हैं। किसान अपने कामों के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। पटवारी संघ ने साफ कहा है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी, तब तक काम पर नहीं लौटेंगे।
नया पीवी ऐप बना हड़ताल की मुख्य वजह
पटवारियों ने बताया कि शासन द्वारा फसल भौतिक सत्यापन के लिए नया पीवी ऐप लाया गया है। इस ऐप में तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं हैं। पटवारियों का कहना है कि खेतों में पानी और फसल खड़ी होने पर हर खेत के चारों कोनों की जीपीएस लोकेशन और फोटो लेकर पॉलीगॉन नक्शा बनाना व्यावहारिक रूप से कठिन है। कई जगह नेटवर्क नहीं मिलता, जीपीएस लोकेशन नहीं पकड़ता और ऐप बार-बार हैंग हो जाता है। खेत में पानी भरा होने से अंदर जाना मुश्किल होता है। इस वजह से सर्वे का काम पूरा नहीं हो पा रहा है।
पुरानी व्यवस्था से काम कराने की मांग
पटवारियों की प्रमुख मांग है कि फसल गिरदावरी का काम पुरानी व्यवस्था के तहत भुइयां पोर्टल से कराया जाए। इसके साथ ही वेतन विसंगति दूर करने और विभागीय पदोन्नति की मांग भी शामिल है। पटवारियों ने कहा कि पुराने पोर्टल में काम आसान था, जबकि नए ऐप में समय ज्यादा लग रहा है और कई तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने शासन से मांगों पर जल्द विचार करने को कहा है।
22 अक्टूबर को किया उग्र प्रदर्शन
22 अक्टूबर 2026 को कांकेर में पटवारियों ने उग्र प्रदर्शन किया। सभी पटवारियों ने काले कपड़े पहनकर शहर में रैली निकाली। प्रशासन द्वारा जारी शो-कॉज नोटिस और निलंबन आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध जताया। पटवारियों ने कहा कि प्रशासन नोटिस देकर डराने का काम कर रहा है, लेकिन वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी भी की गई।
फसल सर्वे और जमीन के कामकाज ठप
हड़ताल के कारण डिजिटल फसल सर्वेक्षण का काम पूरी तरह बंद है। इसके साथ ही नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन जैसे जमीन से जुड़े काम भी प्रभावित हो रहे हैं। किसान परेशान हैं। तहसील कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ है। पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि जिले के सभी तहसीलों के पटवारी हड़ताल में शामिल हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो किसानों को और अधिक परेशानी होगी।



