*बीजापुर के भैरमगढ़ में अवकाश आदेश के बावजूद EMRS में स्कूल संचालन का मामला, प्रशासनिक निर्देशों की अवहेलना और प्राचार्य की जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल*
बीजापुर, 28 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भैरमगढ़ में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS) में जिला प्रशासन द्वारा घोषित अवकाश के बावजूद स्कूल संचालित होने का मामला सामने आया है। यह घटना न केवल प्रशासनिक आदेशों के पालन पर सवाल खड़े करती है, बल्कि विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी को भी कठघरे में खड़ा करती है।
प्राप्त आदेश की प्रति के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारी, बीजापुर द्वारा क्रमांक 2667, दिनांक 27 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान एवं अतिवृष्टि की आशंका को देखते हुए विद्यार्थियों के आवागमन में संभावित परेशानी के मद्देनजर 28 अक्टूबर 2026, बुधवार को जिले के समस्त शासकीय एवं अशासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया था। आदेश में इसे तत्काल प्रभावशील बताया गया है तथा कलेक्टर के निर्देश का उल्लेख भी किया गया है।
इसके बावजूद भैरमगढ़ स्थित संबंधित EMRS विद्यालय में स्कूल का संचालन जारी रहने की सूचना सामने आई है। इस स्थिति में विद्यालय के प्रशासनिक प्रमुख होने के नाते प्राचार्य की भूमिका और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठते हैं। विद्यालय में सरकारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना, संबंधित आदेशों के अनुरूप आवश्यक निर्णय लेना तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना विद्यालय प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
जब जिले में खराब मौसम और चक्रवाती तूफान की आशंका के मद्देनजर अवकाश घोषित किया गया था, तब संबंधित विद्यालय में कक्षाओं का संचालन जारी रहना प्रशासनिक निर्देशों के अनुपालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। ऐसी परिस्थिति में विद्यालय के संचालन का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन है, इसकी निष्पक्ष जाँच आवश्यक है। विशेष रूप से प्राचार्य की भूमिका, उनके द्वारा उठाए गए कदमों और आदेश के अनुपालन को लेकर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
सबसे गंभीर पहलू विद्यार्थियों की सुरक्षा का है। जब संभावित खराब मौसम को देखते हुए विद्यार्थियों के आवागमन में परेशानी की आशंका जताई गई थी, तब विद्यालय का संचालन जारी रखना जोखिमपूर्ण साबित हो सकता था। यदि ऐसे हालात में किसी विद्यार्थी के साथ कोई दुर्घटना या अप्रिय घटना होती, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती? विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
यह मामला केवल एक दिन के अवकाश का नहीं, बल्कि प्रशासनिक आदेशों के सम्मान, विद्यालय प्रबंधन की जवाबदेही और विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा है। विद्यालय के प्राचार्य सहित संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जाँच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि घोषित अवकाश के बावजूद विद्यालय का संचालन क्यों जारी रहा और आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए।
अब जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि वे मामले का तत्काल संज्ञान लें, तथ्यों की निष्पक्ष जाँच कराएँ और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या आदेश की अवहेलना प्रमाणित होती है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।
सवाल सीधा है—जब विद्यार्थियों की सुरक्षा और प्रशासनिक निर्देश सर्वोपरि हैं, तो उनके पालन में चूक होने पर जवाबदेही तय क्यों न की जाए?



